कलीसिया-कैसे-प्रारंभ-करें

How to start A new Church in New place | एक नए स्थान में कलीसिया कैसे प्रारंभ करें

Spread the Gospel

हेलो दोस्तों आज हम सीखेंगे एक नए स्थान में कलीसिया कैसे प्रारंभ करें. इसके लिए किन किन बातों की जरूरत पड़ती है और यह कैसे किया जा सकता है.

कलीसिया-कैसे-प्रारंभ-करें
कलीसिया-कैसे-प्रारंभ-करें https://www.canva.com/

कलीसिया का अर्थ | कलीसिया क्या है?

कलीसिया का अर्थ है चुने हुए और बुलाए हुए लोग, परमेश्वर चुनाव करता है और लोगों को अपने पास बुलाता है जिस प्रकार यूहन्ना की पुस्तक के 15:16 वचन में लिखा है, तुमने मुझे नहीं बल्कि मैंने तुम्हें चुना है और नियुक्त किया है ताकि तुम फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे.

कलीसिया बुलाए हुए लोगों का समूह है जो परमेश्वर के लिए अलग किये हुए हों और परमेश्वर की आराधना करें और उसकी आज्ञा का पालन करें.

कलीसिया का क्या उद्देश्य है?

सर्व प्रथम कलीसिया शब्द का प्रयोग प्रभु यीशु मसीह ने ही किया है. जिसमें उन्होंने कहा मैं अपनी कलीसिया बनाऊंगा और अधोलोक के फाटक उसमें प्रबल नहीं होंगे. कलीसिया के मुख्यत: तीन उद्देश्य हैं. 1. Upreach (परमेश्वर के साथ सम्बन्ध) 2. Inreach (कलीसिया के लोगों के साथ सम्बन्ध) 3.Outreach (कलीसिया के बाहर के लोगों के साथ संबंध) आइये इसे विस्तार से समझते हैं.

1. Upreach (परमेश्वर के साथ सम्बन्ध)

एक कलीसिया का मुख्य उद्देश्य है कि वह अपने परमेश्वर के साथ अच्छा सम्बन्ध रखे. अर्थात प्रार्थना, बाइबल अध्ययन, आराधना आदि के द्वारा कलीसिया के लोग आत्मिक उन्नति करें. किसी ने कहा है जो कलीसिया प्रार्थना नहीं करती वह मरी हुई कलीसिया है.

2. Inreach (कलीसिया के लोगों के साथ सम्बन्ध)

कलीसिया के लिए केवल परमेश्वर के साथ ही नहीं बल्कि अपने विश्वासियों के साथ भी अच्छा सम्बन्ध रखना आवश्यक है. हम अपने भाई को जिसे हम देखते हैं यदि उससे प्रेम नहीं कर सकते तो उस परमेश्वर से कैसे प्रेम कर सकते हैं जिसे हम ने कभी देखा ही नहीं.

देखो, हम सभी स्वर्ग जाने की तैयारी कर रहे हैं जहाँ सभी विश्वासी एक साथ मिलकर आराधना करेंगे. यदि हम अपनी कलीसिया में ही एक मन नहीं हो सकते तो या माफ़ नहीं कर सकते तो कैसे कह सकते हैं कि हम परमेश्वर के द्वारा पापों की क्षमा पाए हुए लोग हैं.

3.Outreach (कलीसिया के बाहर के लोगों के साथ संबंध)

कलसिया का तीसरा मुख्य उद्देश्य है कि, वह अन्य जाति अर्थात अविश्वासियों के बीच में उन्हें भी प्रभु के प्रेम को बताने हेतु उनसे अच्छा सम्बन्ध रखे. प्रभु यीशु मसीह का महान आदेश है जाओ और जाकर सारे जगत के लोगों को सुसमाचार सुनाओ और उन्हें प्रभु यीशु के शिष्य बनाओ.

कलीसिया का संक्षिप्त इतिहास

बहुत से लोग पूछते हैं कलीसिया कैसे प्रारंभ करें या एक नये स्थान में सेवा कैसे प्रारंभ करें. तो हमें सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि कलीसिया की स्थापना प्रभु यीशु ने की है, (मत्ती 16:18) और प्रभु यीशु मसीह के शिष्यों ने उसे बाद में बढ़ाया.

पिन्तुकुस्त के दिन पवित्र आत्मा आने के बाद लोगों की बढ़ोत्तरी हुई और लोगों ने दान वरदान पाकर इस कलीसिया को पुरे विश्व में फैलाया. और अंत में प्रभु यीशु के आगमन में यह कलीसिया प्रभु यीशु के साथ ही बादलों में उठा ली जाएगी.

पढ़ें- कलीसिया का सम्पूर्ण इतिहास

कलीसिया कैसे प्रारंभ करें | कलीसिया स्थापना क्या है?

कलीसिया स्थापना पूर्ण रूप से परमेश्वर का कार्य है. इसमें हम केवल उसके सहकर्मी हैं. यीशु अपनी कलीसिया बनाएंगे…हमें प्रभु ने प्रार्थना करने को कहा है, खेत पक चुके हैं मजदूर थोड़े हैं इसलिए खेत के स्वामी से प्रार्थना करो.

किसी भी कलीसिया रोपण से पहले प्रार्थना करना बहुत जरूरी है. ताकि परमेश्वर स्थान का चयन करने में मदद करें. इसलिए उस निश्चित स्थान में जाकर प्रार्थना करना चाहिए. ताकि परमेश्वर हमारी अगुवाई करें.

एक नए स्थान में कलीसिया रोपण के लिए एक अनुभवी पासवान आवश्यकता है जो वचन का अच्छा ज्ञान रखता हो. उस स्थान में रहने वाले लोगों को नुक्कड़ नाटक, सुसमाचार पत्रिका, बच्चों के बीच सुसमाचार आदि के द्वारा सुसमाचार सुनाया जाए.

सभी लोग जो सकारात्मक रूप से प्रतिउत्तर दें उनका नाम पता लिखकर उनसे मिलना चाहिए और उनसे बातें करना चाहिए और उनके सभी शक संदेह दूर कर उनसे मित्रता बढ़ाना चाहिए. और जरूरत में मदद कर प्रभु के प्रेम को दिखाना चाहिए.

जो विश्वास करें उन्हें चेले (शिष्य) बनाने हेतु कार्यविधि करना चाहिए. जैसे बाइबल स्टडी, गीतों को सिखाना, आराधना और प्रार्थना करना सिखाना और समूह की अगुवाई करना सिखाना आदि के द्वारा शिष्य बनाना चाहिए.

कलीसिया के 6 नियम

1. संडे स्कूल

प्रभु यीशु ने अपने शिष्य पतरस से पूछा क्या तू मुझसे प्रेम करता है, जब पतरस कहा, “हाँ प्रभु तब प्रभु यीशु ने उससे कहा, जा मेरे मेमनों को चरा, यदि हम भेड़ें हैं तो बच्चे मेमने हुए, प्रभु यीशु मसीह चाहते हैं कि बच्चों के बीच में सेवा की जाए. और बच्चों के बीच में सेवा का सबसे अच्छा माध्यम है सन्डे स्कुल.

2. प्रार्थना संगती

जब कुछ बच्चे और बड़े एक नए स्थान में प्रभु की संगती करते हैं तो वहां एक निश्चित समय में सभी को एकत्र करके आराधना के गीतों के साथ और प्रार्थना विनतियों के साथ संगती करना चाहिए. जिससे लोगों की सहभागिता बढ़ सके.

3. बाइबल स्टडी

बिना बाइबल के गहन अध्ययन के कोई भी विश्वासी मजबूत नहीं हो सकता. इसके लिए आवश्यक है बाइबल के गहरे ज्ञान के लिए बाइबल स्टडी लगातार हो. कितने प्रकार से बाइबल अध्ययन किया जा सकता है इसके लिए मैं एक अलग लेख लिखूंगा जिसे आप इस लेख के नीचे लिंक प्राप्त कर सकेंगे. बहरहाल आप सवाल जवाब विधि से प्रारंभ कर सकते हैं.

4. सुसमाचार सुनाना

एक व्यक्ति जब विश्वासी बन जाता है तो उसे प्रभु यीशु का महान आदेश भी सिखाना चाहिए. ताकि उसे प्रभु की सेवा के प्रति बोझ प्राप्त हो और वह भी प्रारंभ में समूह के साथ जाकर सुसमाचार सुना सके और नाश हो रही आत्माओं को बचा सके. जाने सुसमाचार युवाओं को कैसे प्रचार करें?

5. बपतिस्मा

बपतिस्मा प्रभु यीशु की आज्ञा को पूरा करना है, यह धार्मिकता को पूरा करना है जिसे प्रभु यीशु ने भी कर के दिखाया. जिसके द्वारा मनुष्य का पुराना पापी स्वभाव मर जाता है और मसीह में एक नई सृष्टि बनकर प्रभु के लिए जीवन जीने के लिए निर्णय लिया जाता है.

Related Post बपतिस्मा की सम्पूर्ण विधि

6. प्रभु भोज

प्रभु भोज बपतिस्मा पाए हुए लोगों के लिए एक पवित्र विधि है जिसे स्वयं प्रभु यीशु ने बनाई थी और कहा था, मेरे स्मरण में ऐसा ही किया करो, जिसमें हम रोटी और दाखरस का इस्तेमाल कर प्रभु यीशु के दुःख भोग और समस्त मानव के लिए दिए गए बलिदान को याद करते हैं.

Related Post प्रभु भोज सम्पूर्ण विधि

मसीही कलीसिया में मेरा योगदान

मसीही कलीसिया में सेवकाई का तात्पर्य है एक अविश्वासी को सुसमाचार सुनाकर प्रभु यीशु मसीह के विश्वास में लाना और उसे कदम दर कदम बढ़ाकर प्रभु यीशु के समान होने में मदद करना ही सेवकाई है. जिसमें हम सभी विश्वासियों का बराबर की भागीदारी है.

उसमें अपना धन भी दसवांश के रूप में देना, सेवा के लिए समय देना, अपना सब कुछ प्रभु के लिए देने हेतु तैयार रहना. आता है. स्मरण रहे प्रभु में किया हुआ परिश्रम व्यर्थ नहीं होता.

Related Post

प्रभु यीशु मसीह के द्वारा सुनाई गई बेहतरीन कहानी

पवित्र आत्मा के फल क्या हैं

परमेश्वर का मित्र कौन बन सकता है

बाइबल के बेहतरीन 10 लघु संदेश

मानवजाति के लिए परमेश्वर के 5 अद्भुत वायदे

https://anchor.fm/rajesh9/episodes/1–Hindi-Bible-Study-e14ksg2

1616136075751 कलीसिया का अर्थ, कलीसिया का उद्देश्य, कलीसिया का क्या उद्देश्य हैं, कलीसिया का क्या मतलब है, कलीसिया का संक्षिप्त इतिहास, कलीसिया के 6 नियम, कलीसिया कैसे रोपण करें, कलीसिया क्या है, कलीसिया में मेरा योगदान, कलीसिया स्थापना क्या है?, कलीसिया-कैसे-प्रारंभ-करें, नए स्थान में कलीसिया कैसे स्थापित करें, मसीही कलीसिया, हिंदी बाइबल स्टडी नोट्स
पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)
[email protected]

Spread the Gospel

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top