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Top 10 best short motivational stories in Hindi

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दोस्तों आज हम Top 10 best short motivational stories in Hindi पढेंगे ये 10 short hindi stories आपको न केवल प्रेरणा देंगी बल्कि उत्साह से भर देंगीं.

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मैंने अपने बचपन से ही इन हिंदी प्रेरणादायक कहानियों के द्वारा सफलता और जिन्दगी में प्रभावशाली सबक सीखें हैं. शोर्ट मोटिवेशनल स्टोरी कम समय में ही बहुत बड़ी सीख दे देती है. इसलिए ये हिंदी कहानियां मुझे बहुत पसंद हैं. आइये शुरू करते हैं.

#1 Short hindi inspirational story | शेरखान और चिंटू हिरन

मध्य प्रदेश कान्हा किसली नामक घने जंगलों में एक शेर रहा करता था नाम था शेरखान ये वो ही शेरखान है जिसे मोगली फिल्म में फिल्माया गया था.

वह रोज सुबह उठता था तो कसरत करता शिकार में जाने की तैयारी करता और परमेश्वर से प्रार्थना करता था, कि हे परमेश्वर मुझे उस चिंटू हिरन से तेज दौड़ने की शक्ति देना ताकि मैं आज बढ़िया शिकार कर सकूं और अपना भोजन प्राप्त कर सकूं.

उसी समय चिंटू हिरन भी सुबह उठता और परमेश्वर को आज के दिन के लिए धन्यवाद देता और यही कामना करता कि परमेश्वर मुझे उस शेरखान शेर से तेज दौड़ने की सामर्थ देना ताकि मैं उस शेर का शिकार होने से बच जाऊं.

कहानी का मोरल : यदि जीवित रहना है तो हम सभी को दौड़ना होगा मतलब कार्य करना होगा फिर चाहे आप शेर हों या हिरन. चलते रहने का नाम जिन्दगी है और रुकने का नाम मृत्यु.

#2 चींटी और आलसी टिड्डे की कहानी | Short motivational story in hindi

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एक बार एक आलसी टिड्डा था जिसका नाम था बुद्धूमल वह हमेंशा बिस्तर में पड़े रहता था न कोई काम करना न ही कहीं जाना.

लेकिन उसे लगता था वह सबसे ज्यादा बुद्धिमान है इसलिए वह उसके घर के सामने आने जाने वालों को चिढाया करता है और उन पर कुछ कुछ बोलकर फब्तियां कसता रहता था.

तभी उसने देखा एक चींटियों का झुण्ड जो उसके घर के सामने से कतार बनाकर जा रहीं थीं. उसने सोचा चलो इनका मजा लेते हैं उसने उन चींटियों के सामने अपना पैर रख दिया तब चींटियों ने उसके पैरों के किनारे से रास्ता बनाकर जाने लगीं.

तब टिड्डे ने एक बड़ी लकड़ी को उन चींटियों के रास्ते में रख दिया तो क्या देखा वो चींटियों ने उस लकड़ी के बड़े से टुकड़े के ऊपर से रास्ता बना लिया और फिर चलने लगीं

तब वह टिड्डे ने एक बाल्टी पानी लाकर उन चींटियों के रास्ते में डाल दिया इस पर आगे चलने वाली चींटी ने कहा हे बुद्धूमल टिड्डे तुम्हारी समस्या क्या है.

खुद तो कुछ काम धाम करते नहीं और हमारा भी रास्ता क्यों रोक रहे हो. तब टिड्डे ने पूछा अरे तुम लोग इतनी लाइन बना कर जाती कहाँ हो क्यों हमेशा यहाँ वहां भागती रहती हो.

कुछ आराम क्यों नहीं करती. तब चींटी ने जवाब दिया. हम स्वार्थी नहीं हैं हम अपने मित्रों के लिए भोजन इकट्ठा करती हैं, हमें मालूम है बरसात आ रही है और फिर ठण्ड का मौसम आएगा उस समय हम कुछ नहीं कर पाएंगीं इस लिए हम अभी काम करती हैं.

हम कार्य कर करके अपने को इतना मजबूत बना लिया है कि हम अपने से पचास गुना भार उठा सकती हैं. हमें किसी ने कभी भी आराम करते नहीं देखा होगा.

क्योंकि हम लोग अपने कार्य पर विश्वास करते हैं. हम अपने बड़े लक्ष्य को मिलकर और छोटे छोटे हिस्से करके उस लक्ष्य को पूरा करती हैं.

यदि हमें कहीं भोजन का बड़ा भाग मिलता है तो हम अपने सभी साथियों को बताती हैं ताकि सभी उसका आनन्द और लाभ उठा सकें. बुद्धू आलसी टिड्डा चुपचाप चींटी की बात सुनता रह गया.

कहानी की शिक्षा : सफलता सूझबूझ के साथ अपने लक्ष्य के प्रति लगातार चलने और कठिन परिश्रम से मिलती है, आलस से नहीं.

#3 जेलीफिश और घोंघा | Motivational short story in Hindi

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एक जेलीफिश कभी कभी एक घोंघे (Snail) को निगल जाती है. वह घोंघा अपने कड़े कवच के साथ जेलीफिश के अन्दर भी एकदम सुरक्षित और जिन्दा रहता है.

जिन्दा रहने के लिए वह रोज थोड़ा-थोड़ा जेलीफिश को अन्दर से खाता रहता है. और तब तक बढ़ता रहता है जब तक वह पूरी जेलीफिश को खा नहीं लेता और जेलीफिश का अंत नहीं हो जाता. सवाल यह है क्या जेलीफिश ने जानबूझकर अपना विनाश चुना था? शायद नहीं.

उसने जानबूझकर ऐसा किया या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. जेलीफिश का नष्ट होना कोई घटना नहीं बल्कि यह एक निरंतर प्रकिया है.

कहानी का मोरल : हमारे जीवन में भी किये गए लगातार गलत फैसले हमें सर्वनाश की ओर ले जाते हैं. हमारी बुरी आदतें और बुरे स्वभाव अन्दर ही अन्दर हमें खोखला करते रहते हैं.

#4- फैसले कठिन होते हैं | Short inspirational story in Hindi

एक बहुत बड़े और धनी किसान के पास एक बहुत ही मेहनती मजदूर कार्य करता था. किसान का आलू का बहुत ही बड़ा खेत था जिसमें अनेक मजदूर काम किया करते थे. वह मजदूर मेहनती भी था और ईमानदार भी.

इस कारण उसकी कड़ी मेहनत को देखते हुए उसके मालिक मतलब किसान ने उसे सभी मजदूरों के उपर सुपरवाइजर बना दिया.

अब इस सुपरवाइजर होने के नाते उसका काम यह हो गया था कि अब उसे निर्णय लेना था कि इन तमाम आलुओं को तीन भागों में बांटना था पहला सबसे अच्छे बढ़िया आलू, दूसरा कुछ मध्यम वाले आलू और तीसरा सबसे बेकार आलू.

यह काम देकर धनी किसान वहां से चला गया. लेकिन यह मजदूर जो अब सुपरवाइजर बन चूका था वह सुबह से शाम तक वहीँ आलुओं के ढेर के पास बैठा रहा लेकिन किसी एक आलू को भी वह अलग अलग नहीं कर पाया.

वह एक अच्छा मजदूर जरुर था लेकिन कभी उसने निर्णय लेना नहीं सीखा था. वह लोगों के नीचे काम तो ईमानदारी के साथ कर सकता था लेकिन फैसला नहीं ले सकता था.

शाम को जब उसका मालिक उसके पास आया और पूछा अरे तुमने लोगों से काम क्यों नहीं करवाया….इन आलुओं को अलग अलग क्यों नहीं करवाया…

तो उसने जवाब दिया . मैं असमंजस में हूँ कि कौन से आलू को अच्छा कहूँ कौन से को खराब. मैं फैसला नहीं ले पा रहा हूँ.

कहानी की शिक्षा : ठीक बिलकुल इसी कहानी की तरह लोग अपने जीवन का निर्णय इसलिए नहीं ले पाते क्योंकि वो फैसले लेने से डरते रहते हैं. वो एक मजदूर तो बन सकते हैं लेकिन फैसला लेने वाला नहीं.

फैसले लेना कठिन होता है लेकिन उसका परिणाम बहुत ही सुखद और आनन्द देने वाला होता है. फैसले लेने में देर नहीं करनी चाहिए क्या होगा या तो फैसला गलत होगा या सही.

यदि सही हुआ तो बहुत बढ़िया यदि गलत हुआ तो एक सीख मिलेगी और उसके बाद उस फैसले को सही कर लिया जाएगा. लेकिन यदि फैसला ही नहीं लिया गया तो यह वास्तव में एक बहुत ही गलत फैसला होगा.

#5- कभी हिम्मत मत हारें | Powerful short motivational story in hindi

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ये कहानी मुझे बहुत प्रिय है एक बार दो मेंढक जो कि दोस्त थे उन्होंने विचार किया कि चलो गाँव के तालाब से शहर के तालाब की ओर जाएंगे.

ऐसा विचार करके वे दोनों शहर जाने वाले ट्रक में उछल कर कूद कर चढ़ना चाहा. लेकिन उस ट्रक में दूध के बड़े बड़े केन (बर्तन) रखे हुए थे जिन पर दूध भरा हुआ था इस कारण वे दोनों मेंढक दूध में जा गिरे.

अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा था क्या करें. वे दोनों अलग अलग बर्तनों में गिरे थे तो आपस में एक दूसरे को बचाने के लिए सहायता के लिए चिल्ला रहे थे.

लेकिन ट्रक शहर की ओर चल पड़ा था. एक मेंढ़क ने सोचा अब मैं किसी भी रीती से इससे बच नहीं सकता क्योंकि मुझे तो पानी में तैरना आता है दूध में नहीं.

इसलिए वह थोड़े ही देर में दूध में डूब कर मर गया. लेकिन उसी समय दूसरा मेंढक ने सोचा पानी हो या दूध मैं जब तक तैरता रहूँगा जब तक मेरे अन्दर जान है और वह हाथ पैर मारता रहा तैरता रहा.

और बहुत देर तक हाथ पैर चलाने से ऊपर का दूध में मख्खन मथ कर ऊपर आने लगा और मेंढक को एक सहारा मिला और वह उस मख्खन में कदम रखकर उछल कर बाहर निकल पड़ा और अपनी जान बचा लिया.

कहानी की शिक्षा : मुश्किलें जीवन का हिस्सा हैं जब तक हमें इस धरती पर रहने का सौभाग्य मिला है, है उन बाधाओं और चुनौतियों के साथ लगातार जूझने की कीमत चुकानी होगी, यदि हम हार न माने और हाथ पैर चलाते रहे मतलब कठिन परिश्रम करते रहे तो सफलता अवश्य मिलेगी.

#6- आशावादी और निराशावादी | Short story in Hindi motivational

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एक ही कक्षा में पढने वाले दो छात्र थे, दोनों का पारिवारिक माहौल भी एक सा ही था लेकिन एक छात्र आशावादी था और दूसरा निराशावादी.

एक बार स्कूल के प्रिन्सपल (प्राध्यापक) ने इन दोनों बच्चों पर एक शोध करना चाहा. उसने दोनों को अलग अलग अँधेरे कमरों में रखा निराशावादी के कमरे में खिलौने थे और तमाम सुविधाओं को रखा गया था.

लेकिन आशावादी को एक ऐसे कमरे में रखा गया जहाँ घोड़े की लीद से भरा हुआ था. वहाँ केवल बदबू ही बदबू थी और कुछ भी सुविधाएं नहीं थी. दोनों से कहा गया जो भी उन कमरों में तुम्हें मिलेगा वो तुम्हारा इनाम होगा.

लगभग एक घंटे के बाद दोनों कमरों की रौशनी की गई (लाइट) चालू की गई तो क्या देखा गया कि निराशावादी लड़का बड़ा ही उदास था आँखों में आंसू थे.

और अपने खिलौनों और सुविधाओं को पाकर भी कूड़कूड़ा रहा था. लेकिन जब उस आशावादी का कमरा खोला गया और लाइट की गई तो क्या देखा वह बहुत ही ख़ुशी से उन घोड़े की लीद को तेजी हटा रहा था, जैसे कुछ खोज रहा हो.

सभी ने आश्चर्य से पूछा अरे तुम्हें यह देखकर गुस्सा नहीं आया, उसने कहा, मुझे मूर्ख मत बनाओ मैं जानता हूँ यदि यहाँ इतनी घोड़े की लीद है तो यहाँ घोडा भी जरुर होगा मैं उसी घोड़े को अँधेरे में खोज रहा था.

कहानी का मोरल : आशावादी जीवन खुल कर आनन्द से जीते हैं उसी समय निराशावादी हमेंशा संदेह में और निराशा में जीवन काटते हैं. इसलिए आप खुलकर भरपूर जीवन जियें.

#7 – बूढ़ा कुत्ता | मोटिवेशनल कहानी छोटी सी

पिछले दिनों मुझसे एक परिवार मिला उस परिवार में जो पति था वह बहुत परेशान था. उसकी परेशानी के अनेक कारण थे लेकिन जो मुख्य कारण था वो था उसकी नौकरी.

वह एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करता था. उस फैक्ट्री का मैनेजर इसे बहुत परेशान करता था. तनख्वाह भी ज्यादा नहीं थी बस इतनी की घर का खर्ज रो धो के चल रहा था.

यह व्यक्ति कोई अपना काम या छोटा व्यापार करना चाहता था. लेकिन उसकी पत्नी उसे ऐसा करने से रोक रही थी इस डर से कि कहीं असफल हो गए तो… दोनों ओर से जाएंगे. मतलब नौकरी भी और व्यापार भी.

इसी कारण कई महीनो से दोनों के बीच बन नहीं रही थी. इस व्यक्ति को देखकर मुझे उस बूढ़े कुत्ते की कहानी याद आई. जो एक रिटायर फौजी के पास था और सुबह से बड़ी अजीब अजीब सी आवाजें निकाल रहा था.

किसी ने फौजी से पूछा ये ऐसा क्यों कर रहा है. तब फौजी ने जवाब दिया यह जहाँ बैठा है वहां एक आधी कील निकली हुई है जो इसे चुभ रही है.

तो उस पूछने वाले व्यक्ति ने कहा, तो फिर यह कुत्ता वहां से हट क्यों नहीं जाता. तब फौजी ने कहा अभी वह कील इसे पूरी रीती से घुसी नहीं है.

कहानी का मोरल : बहुत से लोग जानते हैं कि उनके जीवन में लाभ कहाँ है लेकिन वे कष्ट में पड़े पड़े कराहते रहते हैं लेकिन कुछ करने का निर्णय नहीं लेते.

#8- छोटी मानसिकता | जबरदस्त मोटिवेशनल कहानी

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समुद्र के किनारे एक मछुआरा रहता था लोग हैरान थे कि वह इतनी जल्दी और इतनी बड़ी मछली कैसे पकड़ लेता है. लेकिन हर रोज वह कुछ अजीब काम करता था.

वह छोटी छोटी मछलियों को तो अपने पास रख लेता था लेकिन बड़ी मछलियों को वापस समुद्र में फेंक देता था. एक दिन उसे देखने वालों ने उसके पास आकर उससे पूछ ही लिया कि आप इतनी बड़ी मछली को वापस समुद्र में क्यों फेंक देते हो.

उसने बड़ी ही सहज भाव से जवाब दिया मैं बड़ी मछलियों को वापस समुद्र में इसलिए फेंक देता हूँ क्योंकि मेरे पास मछली बनाने का छोटा बर्तन है. और उस छोटे बर्तन में केवल छोटी छोटी मछलियाँ ही पकाई जा सकती हैं.

और इतना कह कर वह वहां से चला गया और लोग उसकी मूर्खता पर उसकी ओर टकटकी लगाए देखते ही रह गए.

कहानी की शिक्षा : – दोस्तों बड़ी उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए हमारे पास बड़े सपने और बड़े लक्ष्य होने चाहिए. जितनी चादर उतने पैर नहीं फैलाना चाहिए बल्कि यदि हमारी चादर छोटी है तो हमें बड़ी चादर खरीदनी चाहिए.

#9- फोकस | सोच बदलने वाली कहानी

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एक व्यक्ति चर्च में आकर पादरी से प्रार्थना करना सीखना चाहता था. पादरी ने बताया इसके लिए उसे प्रार्थना में ध्यान लगाना होगा. इस व्यक्ति ने बहुत कोशिश की लेकिन वह शांत बैठ ही नहीं पा रहा था.

प्रार्थना में बार बार वह अपनी आँखें खोल लेता हटा. पूछने पर वह बताता था उसे लगा जैसे जानवर या कीड़ा उसे छूकर गया. फिर वह बाहर जाकर प्रार्थना में ध्यान लगाने लगा.

लेकिन उसे चिड़ियों की आवाज और कौए की कांय कांय से फिर परेशानी होने लगी. तब वह पहाड़ी पर जाकर शांत होकर बैठ गया उसे वहां भी पत्तियों की और हवाओं की आवाज आ रही थी.

उसने गुस्से में चिल्लाकर बोला तुम लोग मुझे ध्यान करने दोगे की नहीं…उसकी आवाज गूंजकर उसे ही सुनाई दी …नहीं नहीं नहीं.

वो थोड़े देर सोचता रहा ये क्या था फिर उसे समझ आया यह तो मेरे ही अन्दर की आवाज थी और वह यह जान गया यदि मैं अन्दर से अशांत हूँ तो बाहर से भी अशांत रहूँगा

और यदि मैं अन्दर से शांत रहूँ तो बाहर की कोई भी अशांति मुझे परेशान नहीं कर सकती. और वह प्रार्थना में मन से ध्यान करने लगा.

कहानी की शिक्षा : शान्ति और फोकस अन्दर से आता है न कि बाहर से.

#10- चलो स्वर्ग पहुंचाएं | मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

एक गाँव में दो दोस्त रहते थे, दोनों जवान हो रहे थे, ज्यादा पढ़ें लिखे भी नहीं थे. लेकिन गाँव में आसपास के लोग इन्हें बहुत पढ़ा लिखा मानते थे.

दोनों ने सोचा यार काम धाम तो हमसे होता नहीं चलो पास के गाँव में लोगों के पास चलते हैं. कुछ पैसा कमाने की कोशिश करते हैं….

अब ये दोनों पास के गाँव में जैसे ही गए तो…क्योंकि वहां के लोग कुछ भी पढ़े लिखे नहीं थे इसलिए लोगों ने इन्हें बहुत पढ़े लिखे विद्वान समझकर इनकी बहुत मेहमाननवाजी की.

भोजन खिलाया. फिर लोगों ने पूछा आप लोग काम क्या करते हैं. इनके पास कुछ काम धाम तो था नहीं इसलिए इन्होने स्वयं को बचाते हुए कहा,

हम ऐसा काम करते हैं कि जो कोई मर गया है उनकी जो आत्माएं भटक रहीं हैं उनके लिए लोगों से दक्षिणा लेकर और देवताओं से कह कर उनकी आत्माओं को हम स्वर्ग पहुंचाते हैं…

अब क्या था इस गाँव में ऐसा कोई भी घर नहीं था जहाँ कोई न कोई बुजुर्ग या पुरखा मरा न हों इसलिए सभी गांववाले उनके पास आकर अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ न कुछ चढाने लगे.

वे दोनों आपस में धीरे धीरे कहने लगे अरे वाह यह काम तो चल पड़ा….अब एक काम करें इस बार का काम तो हो गया अगले साल क्या होगा तो उन्होंने गावं वालों से कहा, हर साल तुम्हें अपने पुरखों की आत्मा की शान्ति के लिए ऐसा ही करना होगा.

मतलब दान दक्षिणा चढ़ाना होगा नहीं तो तुम्हारे पूर्वज सीधे नरक चले जायेंगे….लोग बहुत डर गए…और कहा नहीं नहीं हम हर वर्ष ऐसा ही करेंगे.

वे दोनों बहुत सा धन लेकर अपने गाँव लौट आये. और अपने सभी रिश्तेदारों को बताया हने आज ऐसा काम करके आयें हैं कि हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी को सारे गाँव के लोग धन और दौलत देते रहेंगे. और हम इनके पुरखाओं को स्वर्ग पहुंचाते रहेंगे…..

कहानी की शिक्षा : अन्धविश्वास से बचो और अपने लोगों को भी बचाओ.

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