पाप के विषय में तीन कहानियां |Three Amazing Stories About Sin

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कहानी#1 : लोमड़ी की कहानी

लोमड़ी को केंकड़े पसंद है जब जंगल के पास नदी के किनारे लोमड़ी केंकड़े पकड़ती है तो केंकड़े तुरंत अपने बिल में पत्थर के नीचे घुस जाते हैं...
बहुत कोशिश करने पर भी बिल से नहीं निकलते तब लोमड़ी एक काम करती है वह अपनी पूंछ को पानी में लहराते हुए केंकड़े के बिल के सामने लेकर आती है...थोड़ी देर तक जब पूंछ के सुनहरे बाल पानी में लहराते हैं... तो केंकड़े को लगता है कुछ खाने की चीज है या कीड़ें हैं इसलिए वह धीरे से अपने बिल से नकलकर उस बालों की और लपककर पकड़ लेता है। जैसे ही वह बालों को अपने डंक से पकड़ता है उसी समय लोमड़ी अपनी पूंच को उपर खींच लेती है, और केंकड़ा उसका भोजन बन जाता है.... Moral :- हर अवसर को लपक कर न पकड़ें...रुकें पहचाने कहीं यह शैतान की ओर से तो नहीं हैं??...जानकारी लें, प्रार्थना करें...और तब आगे बढ़ें।

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कहानी#2 : बगुले की कहानी

रेड इंडियन का बगुले पकड़ने का तरीका बड़ा ही रोचक है...वे जानते हैं कि यदि पानी में बैठे बगुलों के पास जाएंगे तो वे तुरंत उड़ जाएंगे। इसलिए वे एक तरीका अपनाते हैं... वे पहले एक या दो कद्दू में आँख मुह बनाकर उसे पानी में बहा देते है जब वह पानी में बहते बहते उन बगुलों के पास से निकलता है तो पहले तो बगुले उसे देखते ही वहां से उड़ जाते हैं... जैसे ही वह कद्दू बह जाता है सारे बगुले फिर वापस आ जाते हैं.... कुछ समय रुक कर वे लोग फिर कुछ और कद्दू बहाते हैं परन्तु इस बार कुछ बगुले उड़ते हैं कुछ थोड़ा सा हट जाते है... कुछ समय के बाद रेड इन्डियन फिर से कद्दू बहाते हैं इस बार सभी बगुले पानी में ही रहते हैं कोई भी नहीं हटता सभी बगुले समझ जाते हैं की यह कद्दू अपने रास्ते आयेगा और चला जाएगा... परन्तु इस बार रेड इन्डियन इन कद्दू में अपने सिर छुपाए आते हैं और धीरे धीरे सारे बगुलों को पकड़ लेते हैं.... Moral :- बुराई से और पाप की अभिलाषाओं से हमेशा भागते रहने में ही भलाई है ...


कहानी#3 बर्फीले भालू की कहानी


बर्फीले भालू जो खून के प्यासे होते हैं जिन्हें किसी भी जानवर या मनुष्य के खून की गंध दूर से ही आ जाती है। उनसे बचना बहुत मुश्किल होता है। बर्फ में मनुष्य उन भालुओं से भी तेज भाग नहीं सकते... इसलिए बर्फ में रहने वाले लोग उनसे बचने के लिए एक तरीका अपनाते हैं... वे तेज धार के चाक़ू में धार की तरफ बकरे या किसी छोटे जानवर का खून लगा देते हैं और उस पर लगातार कई परत खून की लगाकर सुखा लेते हैं और उसे उल्टा चाक़ू अर्थात खून लगी हुई धार को ऊपर की ओर रखकर और पकड़ने का हत्था जमीन पर गाड़ देते हैं... जब उस स्थान के आस पास भालू आता है तो वह उस खून की गंध पाकर उसे जल्दी जल्दी चाटने लगता है और चाटते चाटते उसकी कब उसकी खुद की जुबान कट जाती है भालू को पता ही नहीं चलता...और इस रीति से भालू अपने ही गर्म खून को चाटने लगता है और वहीं मर कर ढेर हो जाता है। Moral : पाप भी ऐसा ही है यदि वह प्रारंभ में मजा दे रहा है तो अंत में मजदूरी मौत ही देगा।

पाप के विषय में बाइबिल क्या कहती है

( रोमियो 6:23) क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है॥ (गलतियो 5:19-21) शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्दे काम, लुचपन। मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। (1 यूहन्ना 1:8-10) यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है॥ (भजन संहिता 19:12-14) अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर।  तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा॥ मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले! (यशायाह 64:6) हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते की नाईं मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु की नाईं उड़ा दिया है। 

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