पवित्र-शास्त्र-बाइबल-का-सिद्धांत

7 Most important Doctrines about the Bible Hindi | पवित्र शास्त्र बाइबल का सिद्धांत

Spread the Gospel

पवित्र शास्त्र बाइबल का सिद्धांत का परिचय

पवित्र शास्त्र बाइबल का सिद्धांत समझने से पहले हमें ज्ञात होना चाहिए बाइबल मसीही विश्वास की आधारभूत पुस्तक है. यह परमेश्वर का वचन है. परमेश्वर प्रारंभ से ही मनुष्य से वार्तालाप करना चाहता है. और चाहता है कि मनुष्य जाति परमेश्वर को को उसके विषय में जाने. इसलिए उसने प्रकृति (सृष्टि) के द्वारा बातें की. जो एक सामान्य प्रकाशन है लेकिन उसने अपने वचन पवित्रशास्त्र बाइबल के जरिये बातें की जो एक विशेष प्रकाशन है. इसलिए इसे जानना बहुत जरूरी है.

पवित्र-शास्त्र-बाइबल-का-सिद्धांत
पवित्र-शास्त्र-बाइबल-का-सिद्धांत Image by Myriams-Fotos from Pixabay

1. पवित्र शास्त्र बाइबल प्रकाशन है

परमेश्वर को पूरी रीती से तथा व्यक्तिगत तौर से जान्ने के लिए हमारे पास सामान्य प्रकाशन से बढ़कर कुछ बातें होनी चाहिए. मतलब हमें पूरे प्रकाशन की आवश्यकता है. परमेश्वर ने अपने आप को हम पर दो तरीकों से प्रगट किया है.

पहला – प्रभु यीशु मसीह के द्वारा (यूहन्ना 1:14-18 इब्रानियों 1:1-3) यीशु के द्वारा परमेश्वर ने मनुष्य बनकर हमारे मध्य में डेरा किया.

दूसरा – लिखित वचन (तिमु. 3:15-17) यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के विशेष प्रकाशन की बातों को लिखित वचन सही साबित करता है.

पवित्रशास्त्र बाइबल परमेश्वर का लिखित वचन है, जिसके द्वारा वह स्वयं को प्रगत करता है तथा पाप से मानवजाति को बचाने केलिए क्या कर रहे हैं इन बातों के विषय में पता चलता है.

पवित्र शास्त्र बाइबल साबित करता है कि इसकी लिखाई परमेश्वर के आदेश के अनुसार हुई है. (निर्गमन 17:14)

पवित्र शास्त्र बाइबल स्वयं को परमेश्वर का वचन कहता है. (प्रेरित 4:24-26) दुनिया में हर चीज को अपडेट करने की जरूरत होती है लेकिन बाइबल में कोई भूल चूक नहीं है इसे जैसा का तैसा रखने को परमेश्वर कहता है और आज भी वह लोगों के जीवन को बदल रहा है.

बाइबल की महत्ता पर बेहतरीन कहानी सुने और पढ़ें

शोर्ट मोटिवेशनल कहानियां पढ़ें

2. पवित्र शास्त्र बाइबल की प्रेरणा

प्रेरणा ऐसी एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा परमेश्वर स्वयं को हम पर ज्ञात करवाते हैं. इस विचारधारा को 2 तिमु. 3:16-17 से लिया गया है जहाँ पर उल्लेखित है कि हर पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है. इसका मूल मतलब है परमेश्वर की स्वास से रचा गया है. आइये इस वचन को देखते हैं.

“और हमारे पास जो भविष्यवक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ ठहरा है और तम वह अच्छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो कि वह एक दीपक है. जो अंधियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है. जब तक कि पौ न फाटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमके पर पाहिले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यवाणी किसी की अपनी ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती. क्योंकि कोई भी भविष्यवाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे. (2 पतरस 1:19-21)

सृष्टि का विवरण परमेश्वर के मुंह कसे निकलनेवाले शब्द की वास्तविकता को दर्शाते हाँ. परमेश्वर ने कहा और संसार उत्पन्न हुआ. परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो वहां उजियाला हो गया. जब परमेश्वर कहते हैं तब वह कार्य करते हैं. (उत्पत्ति 1:1-3)

प्रेरणा से तात्पर्य यह कि परमेश्वर कथन और कार्यवाही दोनों में सम्मिलित हैं. परमेश्वर ने कहा, और मनुष्यों ने उसे उल्लेखित किया. लिखित पवित्रशास्त्र बाइबल में प्रेरणा देने के लिए मानवीय लेखकों के जीवन में परमेश्वर कहते हैं तथा अपनी कार्यवाही को पूरा करते हैं.

3. पवित्र शास्त्र बाइबल का अधिकार

पवित्र शास्त्र बाइबल के अधिकार का तात्पर्य है कि हर एक पवित्र शास्त्र परमेश्वर का ही वचन है. इसलिए हमें उसका पालन करना है. और यदि हम उसका पालन नहीं करते हैं तो हम परमेश्वर के प्रति अनाज्ञाकारी बनते हैं. पवित्र शास्त्र बाइबल परमेश्वर का वचन होने के कारण सत्य है.

प्रेरणा का सिद्धांत इस बात को प्रमाणित करता है कि परमेश्वर स्वयं को मनुष्यों के बीच में प्रगट करते हैं. अधिकार का मामला इस बात से सम्बन्धित है कि पवित्र शास्त्र परमेश्वर का ही वचन है और वे बिलकुल सत्य है.

इसलिए पवित्र शास्त्र बाइबल के अधिकार की भूमिका एक मसीही के जीवन में वह परमेश्वर के वचन को कितना प्राथमिकता देता उस पर निर्भर होता है तथा वचन के प्रति उसका प्रत्युत्तर किस प्रकार होता है.

पवित्रशास्त्र परमेश्वर का ही वचन होने के कारण वे हमें परमेश्वर की योजना उद्देश्य तथा इच्छा को समझने में हमारी सहायता करती है. इन बातों के प्रति हमारी सही समझ हमारे जीवन तथा सेवकाई को बनाने में सहायक सिद्ध होती है.

पवित्र-शास्त्र-बाइबल-का-स
पवित्र-शास्त्र-बाइबल-का-स

4. पवित्र शास्त्र बाइबल की विशिष्टता

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है. और जीव और आत्मा को, और गाँठ गाँठ और गूदे गूदे को अलग करके वार पार छेदता है. और मन की भावनाओं को और विचारों को जांचता है. (इब्रानियों 4:12, प्रेरित 7:38, 1 पतरस 1:23)

पवित्र पवित्र शास्त्र बाइबल पवित्र है और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है. (रोमियो 7:12) ये सत्य को जानने के लिए और उसमें जीवन निर्वाह करने के लिए हमें समझ प्रदान करता है.

तेरा वचन मेरे पाँव के लिए दीपक, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है. (भजन 119:105) 

5. पवित्र शास्त्र बाइबल बहुमूल्य है

यहोवा परमेश्वर का भय पवित्र है वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है, यहोवा के नियम सत्य और पूरी री से धर्ममय है. वे तो सोने से और बहुत कुंदन से भी बढ़कर मनोहर है. वे मधु से और टपकने वाले छते से भी बढ़कर मधुर हैं. (भजन 19:9-10)

इसलिए पवित्र शास्त्र बाइबल भरोसा रखने योग्य है. और अब हे प्रभु यहोवा, तू ही परमेश्वर है और तीरे वचन सत्य हैं और तूने अपने दास को यह भलाई करने का वचन दिया है (2 शमुएल 7:28)

6. पवित्र शास्त्र बाइबल का उद्देश्य

पवित्र शास्त्र बाइबल मानव जाति के उद्धार के लिए है. (इफिसियों 1:13) “उसी में तुम भी, जब तुम ने सत्य का वचन सुना जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किये हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी.”

पवित्र शास्त्र बाइबल निश्चियता, प्रोत्साहन और आशा के लिए है. (भजन 119:49) जो वचन तूने अपने दास को दिया है, उसे स्मरण कर, क्योंकि तू ने मुझे आशा दी है.

पवित्र शास्त्र बाइबल आश्वासन के लिए हैं. (भजन 119:50) मेरे दुःख में मुझे शान्ति उसी से हुई हिया, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैंने जीवन पाया है.

पवित्र शास्त्र बाइबल सुधार के लिए है (भजन 17:4) मानवी कामों में मैं तेरे मुंह के वचन के द्वारा क्रूरों की सी चाल से अपने को बचाए रहा. मेरे पाँव तेरे पथों में स्थिर रहे फिसले नहीं.

7. पवित्र शास्त्र बाइबल किस प्रकार हमारे जीवन में प्रभाव डालता है.

परमेश्वर हमसे एक सिद्ध प्रेमी पिता के समान वचन के द्वारा बातें करते हैं. इसलिए हमें वह जो कहते हैं उसे ध्यान से सुनना चाहिए, और जो सिखाते हैं उसे सीखना चाहिए. और पापों से मनफिराने, हमारे मनों को नया बनाने और हमारे जीवनों को बचाने का प्रयत्न पवित्रआत्मा के अनुग्रह के द्वारा करना चाहिए.

मसीही लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं न कि बाइबल की परन्तु बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर कौन है और उनकी आराधना किस प्रकार करनी चाहिए. इसलिए आराधना में बाइबल की एहमियत है. फलस्वरूप हम परिवर्तन के लिए बाइबल के पास आते हैं न कि केवल जानकारी के लिए.

कलीसिया के इतिहास का एक महान अगुवा मार्टिन लूथर ने इस प्रकार कहा कि, “जब पवित्र शास्त्र बाइबल बात करता है, तब परमेश्वर स्वयं बातें करते हैं, क्योंकि पवित्र शास्त्र से ही परमेश्वर हमसे बातें करते हैं, इसलिए हम उसे मुंह जबानी याद करते हैं. मनन करते हैं. अध्ययन करते हैं. सिखाते हैं, और जो कोई सुनते हैं उन्हें सुनाते भी हैं.

Related Post इन्हें भी पढ़ें

कभी हिम्मत न हारें

हम कैसे विश्वास को बढ़ा सकते हैं

प्रतिदिन बाइबल पढ़ने के 25 फायदे

सुने पॉडकास्ट

प्रकाशितवाक्य की शिक्षा

https://biblevani.com/

पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)

rajeshkumarbavaria@gmail.com


Spread the Gospel

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
Scroll to Top