दोस्तों आज हम एक ऐसी कहानी पढने जा रहे हैं जो पतरस के जीवन में घटी सच्ची घटना है हमने उसका नाम रखा है मछली के मुंह में जवाब | प्रेरणादायक कहानी आइये शुरू करते हैं
मछली के मुंह में जवाब | प्रेरणादायक कहानी

मत्ती 17:24–27 पर आधारित इस घटना में … कफरनहूम शहर में स्थित अराधनालय (मंदिर) के बाहर रोजाना की तरह बहुत भीड़ थी… वहां प्रभु यीशु के चेलों में से शिमौन पतरस भी मौजूद था.
आराधनालय के कुछ सदस्य जो लोगों से कर वसूल करते थे, उसे पहचानते थे. वे पतरस से पूछने लगे क्या तुम्हारा स्वामी (यीशु मसीह) मंदिर का कर नहीं देता.
उन दिनों में कर वसूल करने का अधिकार आराधनालय को हुआ करता था. पतरस थोडा संकुचाया और उन्हें जवाब दिया …हाँ देता तो है....
पर घर लौटते हुए उसके कदम भारी हो रहे थे. क्योंकि वह भली भाँती जानता था कि उनके पास तो पैसे हैं ही नहीं.
इसी सोच विचार में पतरस जब घर पहुंचा और यीशु ने उसे देखते ही सारी बातों को जान लिया, प्रभु यीशु सर्वज्ञानी हैं वे हमारे हृदय की बातों को भी जान लेते हैं.
अत: प्रभु ने पतरस को डांटा नहीं परन्तु यीशु की बातों में करुणा थी और उन्होंने पतरस से एक सवाल पूछा ये प्रभु का एक अनोखा तरीका था
किसी को समझाने के लिए और किसी को जवाब देने के लिए वे उसी से एक सवाल करते थे मतलब एक प्रश्न पूछते थे.
उस प्रश्न में ही सवाल का उत्तर हुआ करता था. प्रभु ने पूछा, ‘पतरस राजा लोग किससे कर वसूल करते हैं अपने बेटों से या दूसरे पराए लोगों से…???
पतरस ने अपने स्वभाव के अनुसार तपाक से जवाब दिया…दूसरे परायों से … प्रभु यीशु हलके से मुस्कुराए और कहा, “फिर तो बेटे स्वतन्त्र हैं“
यह जवाब अपने आप में क्रांतिकारी जवाब था. उस समय पतरस को यह सुनकर कुछ नहीं हुआ वो पूरी रीती से समझा नहीं
लेकिन प्रभु उसे और हमें जो हम यह लेख पढ़ रहे हैं और वो पूरी कौम, मानव जाति जो उस पर विश्वास करेगी उन सभी की पहचान बता रहे थे.
वे कह रहे थे तुम जो मुझ पर विश्वास करते हो गुलाम नहीं हो…पराए नहीं हो बल्कि परमेश्वर की सन्तान हो…जितनो ने उसे ग्रहण किया उन्होंने परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार पाया.
हम पराए नहीं हैं बल्कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं. चाहे हम इसे समझ पाते हों या नहीं. यदि हम समझते हैं और उस अधिकार को इस्तेमाल करते हैं…
तो हमारा स्वभाव परायों से अलग होगा…हमारी बातचीत, देखने का नजरिया सब कुछ अलग होगा. हम स्वर्ग और पृथ्वी के मालिक की गोद ली हुई सन्तान हैं.
हम प्रभु यीशु मसीह के छोटे भाई बहन हैं. हमारे लिए परमेश्वर ने अद्भुत योजनाएं बनाई हैं वो योजनाएं लाभ की हैं हानि की नहीं.
वो सभी वायदे और प्रतिज्ञाएं हाँ और आमेन में हमारे लिए पूरी होकर रहेंगी. यहोवा हमारे लिए सब कुछ पूरा करेगा.
हमें पाप के और दुनिया के अन्धकार के नियम में दबकर रहने की जरूरत नहीं. हम व्यवस्था के अधीन नहीं हैं बल्कि हम राजाओं के राजा सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी परमेश्वर की सन्तान हैं…हालेलुय्याह प्रभु की महिमा हो. ….
और फिर अपनी दीनता में यीशु कहते हैं “ताकि हम उन्हें ठोकर न खिलाएं मतलब वे हमारे कारण ठोकर न खाएं इसलिए तू बंसी लेजाकर नदी में काँटा डाल
और जो पहली मछली आएगी उसके मुंह में एक सिक्का होगा वो लेकर मेरे और अपने लिए कर चुका देना. ”
और दोस्तों ठीक वैसा ही हुआ जिस प्रभु ने सारी सृष्टि रची है आकाश और पृथ्वी को बनाया है उसी प्रभु ने एक मछली के मुंह में पतरस की समस्या का समाधान …
और पतरस के सारे सवालों का जवाब भी रखा था. यह हमें स्मरण दिलाता है कि हमारी सारी आवश्यकताएँ प्रभु से छिपी नहीं हैं.
वे केवल हमारी आत्मा के ही जरूरतों को नहीं बल्कि हमारी भौतिक आवश्यकताओं के भी प्रभु हैं. वो हमारे बताने से पहले ही जानते हैं हमारी क्या क्या आवश्कताएं हैं.
जिस प्रकार उन्होंने पतरस के बिना बताए उसके साथ बीती घटनाओं को जान लिया और वह कैसा महसूस कर रहा है, किस प्रकार की आत्मिक वेदना से होकर जा रहा है जान गए और उस समस्या का निवारण किया.
उसी प्रकार वे हमारी भी सभी परिस्थितियों को भी जानते हैं और उसका निवारण करने हेतु सक्षम हैं…
जब पतरस ने प्रभु की आज्ञा पालन किया हो सकता है वह रास्ते में सोच रहा हो यह कैसा आदेश है लेकिन उसकी आज्ञा पालन उसके जीवन में एक नया परिवर्तन लेकर आई.
उसका विश्वास बढ़ा और नाम धराई भी मिट गई. उसे पता चला कि सारी सृष्टी प्रभु की आज्ञा मानती है. प्रिय पाठक मैं आज आपको प्रोत्साहित करना चाहता हूँ…
जिस प्रकार प्रभु ने पतरस की समस्याओं का समाधान मछली के मुंह में रखा था विश्वास करें वह आज भी आपकी समस्याओं का समाधान भी और आपके प्रश्न का उत्तर भी तैयार रखा है.
बस विश्वास रखें और आज्ञा का पालन करें. अपने जीवन में इस वर्ष महान परमेश्वर की महिमा देखने के लिए तैयार रहें.
अपने आसपास किसी बाइबिल पर आधारित चर्च में जाकर उसके सदस्य बनें और प्रभु की महिमा करें प्रभु आपके जीवन में प्रतिदिन चमत्कार करें.
आप सत्य को जानेगे और सत्य आपको हर एक छल से स्वतंत्र करेगा. (यूहन्ना 8:32)
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