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बाइबिल हमें देने के विषय में स्पष्ट बताती है, Giving to God is a blessings, kyonki परमेश्वर ने हमें सब कुछ दिया है, लेकिन सभी लोग वैसे नहीं देते जैसा बाइबिल में लिखा है, हम तीन कहानियां पढने जा रहे है जो बताती लोग कैसे देते हैं

सेठ की मन्नत

एक मोटा सेठ व्यापार के लिए दुसरे शहर गया हुआ था। लौटते समय वह पैसे बचाने के चक्कर में पैदल ही जंगल के रास्ते अपने गाँव जाने लगा…

परन्तु जंगल बहुत ही घना था इसलिए वह रास्ता भटक गया। भूख भी लग रही थी लेकिन दूर दूर तक न कोई आदमी दिख रहा था न ही कुछ खाने की वस्तु। तभी उसने दूर एक नारियल का पेड़ देखा जिसमें नारियल लगे हुए थे।

सेठ के पेट में तो चूहे कूद रहे थे…उसने पेड़ में चढ़ने का निर्णय लिया और धीरे-धीरे पेड़ में चढ़ने लगा। कुछ देर में वह नारियल के बस कुछ ही दूरी पर था तब उसने एक बार नीचे की ओर देखा…

तो उसे तो चक्कर ही आने लगे…उसे ऊंचाई के डर से पसीने आने लगे।

मारे डर के वो परमेश्वर से प्रार्थना करने लगा सोचा यदि मैं इतनी ऊंचाई से गिरा तो मेरा तो पेट ही फट जायगा। वह प्रार्थना में परमेश्वर से मन्नत मांगने लगा… प्रभु आप मुझे बचा लीजिए मैं कलीसिया में एक लाख रूपये दान करुगा और सभी को भोजन भी करवाऊंगा… और आखें बंद करके धीरे धीरे नीचे उतरने लगा….

थोड़ा नीचे उतरने के बाद कहने लगा… एक लाख तो ज्यादा हैं ….प्रभु मैं पचास हजार जरूर दूंगा..और नाश्ता करवाऊंगा…

दो फीट और नीचे आने के बाद कहने लगा प्रभु 10 हजार जरूर दूंगा जब वह धरती से चार फीट ऊपर रह गया तो कहने लगा प्रभु मैं 500 रूपये जरुर दूंगा और सभी को चाय पिलवाऊंगा…

इतना कह ही रहा था की उसका हाथ फिसल गया और धड़ाम से नीचे गिरा….

वह कराहते हुए उठकर बोला प्रभु यदि सौदा मंजूर नहीं है तो धक्का क्यों दे रहे हो….

😂😂😂😂😂

मैं ऐसे देता हूँ

तीन दोस्त थे रमेश, मुकेश और सुरेश…इन तीनों में कुछ आदतें समान थीं.. तीनो अलग-अलग कलीसिया जाने वाले थे।

एक दिन तीनों आपस में इस विषय पर बातें करने लगे की कौन अपने परमेश्वर की सेवा के लिए कलीसिया में भेंट देता है…. और कैसे कैसे देता है???

रमेश ने कहा मैं तो जैसे ही तनख्वाह मिलती है…मैं जमीन में एक फीट का एक गोला बनाता हूँ और दस फीट की दूरी से उसमें अपने सारे पैसे फेंकता हूँ…और जो पैसे गोले के अंदर आते हैं वो मैं परमेश्वर की सेवा के लिए कलीसिया में देता हूँ… और जो पैसे बाहर गिरते हैं वो अपने खर्च के लिए रख लेता हूँ।

मुकेश ने तपाक से कहा अरे ऐसा तो मैं भी करता हूँ…लेकिन फर्क इतना है की जो पैसे गोले के बाहर गिरते हैं वो पैसे मैं परमेश्वर को देता हूँ और जो पैसे गोले के अंदर गिरते हैं उन्हें मैं अपने महीने भर के खर्च के लिए स्तेमाल करता हूँ….

अब सुरेश की बारी थी….रमेश और मुकेश दोनों ने सुरेश से कहा सुरेश तुम भी बताओ तुम भी तो कलीसिया में भेंट देते होगे…तुम भी बताओ आखिर तुम कैसे देते हो???

सुरेश ने कहा, ‘मैं भी अपनी पेमेंट पाकर जब आता हूँ तो मैं भी एक गोला बनाता हूँ परन्तु मैं उस गोले में खड़ा हो जाता हूँ और अपने पैसे आसमान की ओर फेंकता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि परमेश्वर जो आप चाहते हैं उसे ऊपर ही पकड़ लो और ले लो ….और जितने नीचे गिर जाते हैं उन्हें मैं अपने खर्च के लिए रख लेता हूँ…

😅😂😃😃😆

दस केले

एक लड़का किसी कारण से किसी समुद्री टापू में फंस गया…

दो दिन से वह वहां रोता चिल्लाता रहा परन्तु उसकी आवाज किसी ने न सुना….

वह प्रार्थना करने लगा प्रभु तू मुझे कुछ खाने को दे मैं हमेशा तुझे अपना दसवांश दिया करूँगा ….

अपने हर चीज से आपको दसवा भाग भेंट दिया करूँगा….

तभी उसे आश्चर्य रीति से एक केले का पेड़ दिखा जिसमें 10 पके केले लेगे दिखाई दिए…

वह मारे खुशी के दौड़ा और दस केले तोड़ कर परमेश्वर को धन्यवाद करने लगा…

की परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन ली…

अपने वायदे के अनुसार उसने एक केला परमेश्वर के लिए निकाल कर अलग कर के रख दिया…

और जल्दी जल्दी उन नौ केलों को खाने लगा…

जैसे ही उसने अपने नौ केले खा के खत्म किये तो उसे यह दसवां केला कुछ ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगा और लगा जैसे यह ज्यादा मीठा होगा….

उसने कहा, ‘परमेश्वर आप तो केले नहीं खाते…

तो मैं ही इसे आपके लिए खा लेता हूँ….

और ऐसा कहकर उसने उस केले को भी खा लिया….

😅😂😃😃😆

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1 thought on “परमेश्वर को भेंट देने पर तीन अद्भुत कहानियां | Three Amazing Stories About Giving to God”

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