मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा

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मांगो-तो-तुम्हें-दिया-जाएगा दोस्तों आज हम बाइबिल के एक गहरे विषय के रहस्य को जानेगे जिसका नाम है मांगो तो तुम्हे दिया जाएगा.

मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा | Keep on Asking and it shell be given to you

मांगो-तो-तुम्हें-दिया-जाएगा

दोस्तों आपका स्वागत है इस ब्लॉग में, इन्टरनेट के इस समुद्र में आपने इस ब्लॉग को प्राप्त कर लिया है तो विश्वास कीजिए
यह परमेश्वर कि मर्जी है कि आप इस सत्य को जानें जो आपका जीवन बदलने जा रहा है.

लिखा है तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हे आजाद कर देगा.

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम प्रार्थना करते हैं, तो क्या वाकई कुछ बदलता है?

हम सबने जीवन में कभी न कभी कुछ न कुछ माँगा जरुर होगा. लेकिन क्या हमारी प्रार्थनाएं सिर्फ हवा में तैरती रहती है, या उनके पीछे कोई गहरा नियम काम कर रहा है?

आज हम बाइबिल के ईद बेहद प्रसिद्ध और शक्तिशाली वचन पर गहराई से बात करेंगे. और वो है …

“मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा. ढूंढो, तो तुम पाओगे. खटखटाओ तो तुम्हारे लिए खोला जाएगा (मत्ती 7:7)

इसके मूल शब्दों में ऐसा रहस्य छिपा है जो हमारी प्रार्थना करने का तरीका ही बदल कर रख दे?

यदि हम इसके मूल ग्रीक भाषा के अर्थ को सटीक रूप में अनुवाद करें, तो इसका मतलब यह होगा.

–मांगते रहो, और तुम्हें दिया जाएगा.

–ढूढ़ते रहो, और तुम पाते रहोगे.

– खटखटाते रहो, और तुम्हारे लिए खोला जाता रहेगा.

यह कोई एक बार कि गई मांग नहीं है. मतलब यह कोई वेंडिग मशीन में सिक्का डालने जैसा सौदा नहीं है की एक बार बटन दबाया और चीज मिल गई.

मूल भाषा में यह एक निरंतर चलने वाले रिश्ते को दर्शाता है. एक बच्चे का अपने पिता के साथ ऐसा रिश्ता, जहाँ वह हर पल उस पर निर्भर रहता है.

यह जिद या निराशा कि रट लगाना नहीं है. बल्कि उस जीवित परमेश्वर के साथ लगातार संगति में बने रहना है जो तुम्हें देने में आनन्द लेता है.

अक्सर हम परमेश्वर से तब मांगते हैं जब संकट आता है, और जब तुरंत उत्तर नहीं मिलता तो हम शिकायत करने लगे हैं या माँगना ही छोड़ देते हैं.

लेकिन मूल भाषा का यह रहस्य हमें सिखाता है की प्रार्थना असल में परमेश्वर के साथ हमारे जुड़ाव का पैमाना है.

जब हम बार उसके पास जाते हैं, तो हम अपनी अहंकारी आत्मनिर्भरता को तोड़ते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि हमें उसकी हर पल जरूरत है.

और यहीं एक बात समझने कि है . जब हम बाइबिल के इस वायदे को पकड़कर लगातार मांगते हैं, तो हमारा दृष्टिकोण बदल जाता है.

हमारी मांगे सिर्फ हमारी भौतिक इच्छाओं तक सिमित नहीं रहतीं, बल्कि हम वही चाहने लगते हैं जो परमेश्वर हमारे लिए चाहता है.

मनुष्य जब परमेश्वर से मांगता है तो उसके दृष्टिकोण और उसके मांगने के तरीके में बहुत अंतर होता है. बाइबिल में मुख्य रूप से दो तरीकों का उल्लेख मिलता है.

कुड़कुड़ाकर (शिकायत करते हुए) और धन्यवाद के साथ।

1. कुड़कुड़ाकर (शिकायत करते हुए असंतोष के साथ माँगना)

जब मनुष्य अपनी परिस्थितियों से निराश होकर, अविश्वास में और परमेश्वर कि भलाई पर संदेह करते हुए मांगता है, तो उसे कुड़कुड़ाकर या शिकायत करना कहा जाता है. इसमें परमेश्वर कि व्यवस्था या प्रावधान के प्रति विद्रोह झलकता है.

बाइबिल में एक उदाहरण है . गिनती कि पुस्तक Numbers 11:4-6, 33-34 में. जब इस्राएली लोग मिस्र कि दासता से छूटकर जंगल के रास्ते में थे.

तो वे मन्ना जो परमेश्वर उन्हें रोज स्वर्ग से प्रदान करता था. वे उससे ऊब गए. और वे रो रोकर कहने लगे …हमें मांस खाने को कौन देगा?

हमें मिस्र में मांस मछली मन माना खाते थे लेकिन यहाँ इस जंगल में निकम्मा मन्ना खाकर हम उब गए हैं. इसके सिवा हमारे पास और कुछ नहीं.

इसका परिणाम क्या हुआ? इसके परिणामस्वरूप परमेश्वर का क्रोध भड़क उठा. परमेश्वर ने उनकी मांग तो पूरी कर दी लेकिन.

परमेश्वर ने ऐसी पुरवाई चलाई कि समुद्र से लाखो लाखों बटेर पक्षी इस्राएलियों के तम्बुओं के इर्द गिर्द आकर गिर पड़े. इतना कि जहाँ वे देखें वहीँ केवल मांस ही मॉस था.

मरे हुए पक्षियों के एक बहुत ही बड़ा ढेर लेकिन जैसे ही उन्होंने उसे खाया वे मर गए. परमेश्वर ने उन्हें महामारी से मारा.

उस स्थान का नाम ‘किब्रोथ हत्ताआवा’ (अर्थात लालसा की कब्रें) रखा गया, क्योंकि वहाँ उन लोगों को गाड़ा गया जो लालची और कुड़कुड़ाने वाले थे।

2. धन्यवाद के साथ मांगना (विश्वास और कृतज्ञता के साथ)

जब मनुष्य अपनी चिंताओं और जरूरतों को परमेश्वर के सामने रखता है, लेकिन साथ ही उसकी पिछली भलाइयों के लिए धन्यवाद देता है और नम्रता के साथ उसके नियन्त्रण पर भरोसा रखता है,

तो इसे धन्यवाद के साथ माँगना कहा जाता है. बाइबिल में एक उदाहरण है (फिलिपीयों 4:6) में प्रेरित पौलुस कहते हैं.

: किसी भी बात कि चिंता मत करो. पर हर एक बात में तुम्हारे निवेदन प्रार्थना और विनती धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सामने प्रस्तुत किये जाएं.

जब प्रभु यीशु ने चार दिनों से मरे हुए लाजर की कब्र के सामने आँखें ऊपर उठाकर पिता परमेश्वर से प्रार्थना की.

“हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ, की तू ने मेरी सुनी है…यीशु ने चमत्कार होने से पहले ही धन्यवाद दिया. इसका परिणाम हुआ शान्ति प्राप्ति हुई …जीवन प्राप्त हुआ. …

फिलिप्पियों 4:7 में आगे लिखा है की जब हम धन्यवाद के साथ निवेदन करते हैं, तो परमेश्वर कि शान्ति जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी.

धन्यवाद भरा हृदय इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति का परमेश्वर पर अटूट विश्वास है। ऐसे विश्वास से प्रार्थनाएं सुनी जाती हैं और महिमा प्रकट होती है (जैसे लाजर का जीवित होना)।

– कुड़कुड़ाकर मांगने का परिणाम: असंतोष, परमेश्वर का अनुशासन, और अंततः आत्मिक व शारीरिक हानि.

– धन्यवाद के साथ मांगने का परिणाम: परमेश्वर की गहरी शांति, मन की संतुष्टि, और प्रार्थना का उत्तर जो जीवन में आशीष लेकर आता है.

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