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प्रतिदिन बाइबल पढ़ने के 25 फायदे | 25 Important Reason of Reading Bible in Hindi

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“बाइबल पढ़ने का प्रार्थमिक उद्देश्य बाइबल को जानना नहीं बल्कि परमेश्वर को जानना है.”

जेम्स मेरिट
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Image by StockSnap from Pixabay बाइबल-पढ़ने-के-फायदे

बाइबल पढ़ने के फायदे अद्भुत हैं. इस दुनिया में प्रभु यीशु के बाद यदि परमेश्वर का कोई सर्वोत्तम उपहार है वो है बाइबल. यह सभी मानव जाति के लिए परमेश्वर का प्रेमपत्र है. परमेश्वर के वचन को जो पढता है वो पाप से दूर रहता और जो पाप करता है वह बाइबल से दूर रहता है.

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1. यह हमें सत्य प्रदान करती है.

यूहन्ना 17:17 में लिखा है तेरा वचन सत्य है.… आज सत्य के लिए लोग लड़ते हैं झगड़ते हैं यहाँ तक कि सत्य के लिए जान भी देने को तैयार हैं लेकिन बहुत कम हैं जो रुक कर कुछ समय निकालकर यह जानने की कोशिश करें, कि सत्य है क्या? प्रभु यीशु सत्य हैं, परमेश्वर सत्य है और उनका वचन भी सत्य है. तुम सत्य को जानोगे और तुम स्वतंत्र हो जाओगे.

2. यह हमें आत्मिक उन्नति प्रदान करती है.

3 यूहन्ना 1:2 कहता है, जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है मेरी इच्छा है सभी बातों में उन्नति करता जा और भला चंगा स्वस्थ रह. हमारे जीवन में जो भी भौतिक आशीषें हैं वो सभी आशीषें हमारी आत्मिक आशीषें से जुड़ीं हुई हैं. मतलब यदि हमारा सम्बन्ध हमारे परमेश्वर से अच्छा है तो इस संसार की तमाम आशीषे भी वो हमें यूं ही प्रदान कर देंगे. प्रभु यीशु ने कहा, पहले तू धर्म और राज्य की खोज कर मतलब परमेश्वर की खोज कर तो तुम्हें बाकी सारी वस्तुएं मिल जाएंगी.

3. यह हमें पाप से बचाती है.

प्रभु के किसी दास ने इस प्रकार कहा है परमेश्वर के वचन को जो पढता है वो पाप से दूर रहता और जो पाप करता है वह बाइबल से दूर रहता है. इस्राएल का महान राजा दाउद ने अपने भजन में इस प्रकार लिखा है, मैंने तेरे अर्थात परमेश्वर के वचनों को अपने दिल में रख छोड़ा है ताकि में तेरे विरुद्ध पाप न करूँ (भजन 119:11) एक जवान भी अपने चालचलन को परमेश्वर के वचन के द्वारा सावधान रहने के द्वारा पवित्र रह सकता है. (भजन 119:9)

4. यह हमें पापों से शुद्ध करती है.

प्रभु यीशु ने कहा तुम उस वचन के द्वारा जो मैंने तुमसे कहा है शुद्ध हो. (यूहन्ना 15:3) प्रभु का वचन बताता है यह कि, आदि में वचन था वचन परमेश्वर के साथ था और यही वचन परमेश्वर था. और इस वचन के द्वारा ही हम शुद्ध होते हैं. वचन हमारे हृदय में जाकर हमें पापों से छुटकारा देता है.

5. यह हमें सफलता दिलाती है

प्रभु परमेश्वर ने मूसा के मरने के बाद उसके दास यहोशु को पहली बार बाइबल अर्थात (पहली पांच पुस्तक) के विषय में बताया यदि वह इसे पढ़े और रात दिन उस पर मनन करे तो वह न केवल सफल होगा बल्कि प्रभावशाली भी होगा. (यहोशु 1:8-9) और हम बाइबिल में पाते हैं यहोशु मूसा के पश्चात एक अच्छा अगुवा बना जिसने लाखों लोगों को कनान देश में प्रवेश करने में सहायता किया और अनेक युद्ध में विजयी रहा.

6. यह हमें बुद्धिमान बनाती है.

परमेश्वर का वचन खुलने से प्रकाश होता है उससे भोले लोग समझ पाते हैं. भजन 119:130 परमेश्वर के वचन को प्रतिदिन पढ़ने से हरेक व्यक्ति बुद्धि प्राप्त कर सकता है. इसमें व्यवहारिक ज्ञान है जो हमें रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल होने वाली बातें हैं. 2 तीमुथियुस 3:15 में पौलुस तिमोथी अपने शिष्य को लिखते हुए कहते हैं…पवित्रशास्त्र तेरा बालकपन से जाना हुआ है यह पढ़ने से तुझे मसीह यीशु में विश्वास करने हेतु बुद्धिमान वना सकता है. बुद्धि यहोवा परमेश्वर ही देता है.

7. यह हमें शान्ति प्रदान करती हैं

119:165 तेरे वचन से प्रेम करने वालों को बड़ी शान्ति होती है. आज इस संसार में जो सभी लोग शान्ति को पाने के लिए भटक रहे हैं. कितनी भी महंगी गाड़ी खरीद लें या कपड़े पहन लें यदि मन में शान्ति नहीं तो सब कुछ फीका और बेस्वाद सा प्रतीत होता है. प्रभु यीशु ने कहा मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ जो तुम्हें यह संसार नहीं दे सकता. सच्ची शान्ति वो अद्भुत वरदान है जो आपको परिश्थिति में आनन्दित रखती है.

8. यह हमारे विश्वास को बढ़ाती है.

इस संसार में जो जय प्राप्त करता है. वो हमारा विश्वास है. और उस विश्वास को बढ़ाने के लिए यदि कुछ है तो वह है परमेश्वर का वचन. प्रभु यीशु से उसके शिष्य कहने लगे प्रभु हमारे विश्वास को बढ़ा क्योंकि वे जानते थे. विश्वास ही है जिससे सब कुछ सम्भव है. विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है. (रोमियो 10:17)

9. यह हमें आशा प्रदान करती है.

भजन संहिता 130:5 मैं परमेश्वर की बाट जोहता हूँ मैं जी से उसकी बाट जोहता हूँ और मेरी आशा उसके वचन पर है. परमेश्वर का वचन ही हमें जीवित आशा प्रदान करता है. वह कहता है तेरे लिए मेरे पास बड़ी योजनाएं हैं वो योजनाएं लाभ की हैं हानि की नहीं और अंत में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा. (यिर्म. 29:11)

10. यह हमें हर्ष और आनन्द प्रदान करती है.

भविष्यवक्ता यिर्मियाह कहते हैं जब मुझे तेरे वचन मिले तो मानो मैंने उसे खा लिया और वे वचन मेरे लिए हर्ष और आनन्द के कारण हुए हैं. (यिर्म. 15:16) राजा दाउद कहते हैं तेरे वचन को पाकर मैं ऐसा आनन्दित होता हूँ जैसे कोई बड़ी लूट पाकर आनन्दित होता है. क्योंकि परमेश्वर के वचन किसी भी ताए हुए सोने से कहीं बढ़कर कीमती हैं.

11. यह हमें मार्गदर्शन प्रदान करती है.

अनेकों बार जीवन में ऐसे समय आते हैं जब हम एक ऐसे स्थान में आकर खड़े हो जाते हैं जहाँ हमें समझ में नहीं आता अब क्या निर्णय लिया जाए. कौन हमारी मदद करेगा? या रास्ता दिखाएगा? ऐसे समय में परमेश्वर का वचन ही है जो सही और सीधा मार्ग दिखाता है (नीति 3:5) जब तुम दांये बाएँ मुड़ने लगो मतलब क्न्फ्युस होने लगो तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा कि मार्ग यही है इसी में चलो. (यिर्म 30:21)

12. यह हमें आगे बढ़ाती है.

बाइबल एक मानव को सर्वागीण विकास के लिए परमेश्वर के द्वारा दिया गया सर्वोत्तम उपहार है. इसलिए संत पौलुस अपनी पत्री में कहते हैं, जैसे तुमने मसीह यीशु को प्रभु उद्धारकर्ता करके ग्रहण किया है उसी प्रकार उसमें जड़ पकड़ते बढ़ते जाओ. (कुलु 2:6-7) हरेक चीज जिसमें जीवन है वो बढ़ता है और उन्नति करता है. हमें आत्मिक रीति से बढ़ने के लिए आत्मिक रोटी अर्थात परमेश्वर का वचन चाहिए. जैसे प्रभु यीशु ने कहा, मनुष्य केवल रोटी से नहीं वरन हरेक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकला जीवित रहेगा.

13. यह शैतान से मेरी रक्षा करता है.

परमेश्वर का वचन किसी भी दोधारी तलवार से तेज और धारदार है.(इब्रा 4:12) प्रभु यीशु ने वचन के द्वारा ही शैतान को हराया था. और वह हमसे भी ऐसा ही करने की अपेक्षा करता है. प्रभु ने कहा जब तुम नाना प्रकार की परीक्षा में पड़ो और तुम्हें न्यायालय में खड़ा किया जाएगा तो भी तुम चिंता न करना की हम क्या बोलेंगे क्योंकि तुम्हें पवित्रात्मा के द्वारा उस समय बोल दिया जाएगा. प्रभु का वचन हमें हरेक अंधकार की शक्तियों से लड़ने में सहायता करता है.

14. इसे पढ़ने और सुनने वाला आशीष पाता है.

भविष्यवाणी की यह पुस्तक जो कोई पढ़ेगा और जो कोई इसे सुनेगा दोनों को आशीष मिलेगी (प्रकाशितवाक्य 1:3) यह परमेश्वर का वचन है जो न केवल ज्ञान से वरन परमेश्वर की इच्छा और आज्ञा से परिपूर्ण है. यही कारण है दुनिया का सबसे नम्र व्यक्ति मूसा इस्राएलियों को चेतावनी देकर कहता है. यदि तुम चित्त लगाकर मेरे वचनों को सुनो तो तुम पर ये आशीर्वाद पूरे होंगे कि तुम सारी जातियों में आशीषित लोग होंगे. और तुम्हारी सारी वस्तुओं पर परमेश्वर आशीष देगे. (व्यव. 28:1-15)

15. यह हमें अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करती है.

परमेश्वर के वचनों को पढने एवं पालन करने वाला व्यक्ति स्वस्थ और भला चंगा भी रहता है. यदि हम अपनी बुद्धि का सहारा न ले और सम्पूर्ण मन से यहोवा परमेश्वर पर भरोषा करें और उसी को याद करके सारे काम करें तो परमेश्वर हमारे लिए एक सीधा सरल मार्ग निकालते हैं और ऐसा करने से हम भले चंगे और स्वस्थ भी रहते हैं (नीतिवचन 3:5-7) उसका वायदा है वो कहता है, मैं तुम्हें दीर्घायु से तृप्त करूँगा.

16. यह हमें कर्जदार होने से बचाती है.

कर्ज के शाप के समान है, जिसमें एक मनुष्य टेंसन के कारण घुलता रहता है. और उसका मन किसी भी भले कामों में नहीं लगता. कर्ज के कारण कितने लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं. लेकिन परमेश्वर का वचन हमें बताता है. यदि हम उसके वचन को सुने और पूरा करने का निर्णय लें तो हमें किसी से कर्ज (उधार) लेना नहीं पड़ेगा बल्कि हम कर्ज दे सकेंगे. (व्यवस्था 28:12)

17. यह हमें आत्मविश्वास देती है.

परमेश्वर के वचनों को पढ़ने वाला जानता है कि उसे सामर्थ परमेश्वर की ओर से मिलती है और वह जानता है प्रभु उसके साथ है तो वह बड़े से बड़ा काम भी कर सकता है. जिस प्रकार संत पौलुस ने कहा, मैं उसमें जो मुझे सामर्थ देता है अर्थात मसीह यीशु में सबकुछ कर सकता हूँ. (फ़िलि 4:13) प्रभु का शिष्य पतरस भी हमें स्मरण दिलाते हैं तुम एक चुना हुआ वंश हो राजपदधारी याजको का समाज हो. (1 पतरस 2:9)

18. यह हमें नया दृष्टिकोण प्रदान करती है.

जब तक हम सच्चे और जीवते परमेश्वर को और उसके वचन अर्थात बाइबल को नहीं जानते तो अपने ही मन के अनुसार चलते हैं और अज्ञानता में भटकते रहते हैं. लेकिन परमेश्वर का वचन हमारे जीवन में आने से जीवन पूरी रीति से बदल जाता है. और पुरानी बातें बीत जाती हैं और हम एक नए मनुष्य बन जाते हैं. एक नई सृष्टि. हमारे ऊपर से पर्दा सा हट जाता है. और हम जान लेते हैं हम तो जगत की ज्योति हैं…अब तक अंधकार में जी रहे थे. (मत्ती 5:14)

19. यह हमें प्रोत्साहित करती है.

परमेश्वर के वचन से बढ़कर दुनिया में और कोई भी सच्चा प्रोत्साहन नहीं है. बाइबल हमें बताती है कि हम जगत के नमक हैं. हम जानते हैं नमक का कोई भी दूसरा विकल्प नहीं है. बिना नमक कोई भी भोजन बेस्वाद का होगा. और नमक थोड़ा ही डाला जाता है. अत: हम वो चीज हैं जिसके द्वारा इस धरा में इस संसार में स्वाद प्रदान होता है. हम बिना काम के इस धरा में नहीं हैं. हम बहुतों के आशीष के लिए इस दुनिया में मौजूद हैं. विश्वास करने वाले बोलें आमेन.

20. इसके द्वारा बहुतों का पालन पोषण होता है.

बाइबल में लिखा है धर्मी के वचनों से बहुतों का पालन पोषण होता है. देखिए कोई भी अपने कर्मों से धर्मीं नहीं ठहर सकता. धर्मीं परमेश्वर ही ठहराता है. प्रभु यीशु के लहू से हम सभी विश्वास करने वाले धर्मीं ठहरते हैं. अत: धर्मी अर्थात विश्वासी विश्वास के अर्थात परमेश्वर के वचन से ही बातें करेगा इसलिए धर्मी के वचनों से अर्थात बाइबल से बहुतों का पालन पोषण होता है. (नीति 10:21)

21. इसके द्वारा अन्धकार में उजियाला होता है.

भजनकार कहने लगा, तेरा वचन मेरे पाँव के लिए दीपक और मार्ग के लिए उजियाला है. (भजन 119:105) जहाँ परमेश्वर का वचन खोला जाता है वहां उजियाला होता है मन का उजियाला. वो परिवार और वो जीवन फिर पाप रूपी अन्धकार में नहीं भटकता बल्कि परमेश्वर के ज्ञान रूपी उजियाले में चलता है.

22. यह हमें प्रभावशाली बनाती है.

हरेक व्यक्ति अपने जीवन में चाहता है जब वो कुछ बोले तो लोग उसकी सुने. उसे आदर दें. वो लोगों के बीच प्रभावशाली हों. परमेश्वर ने मूसा के दास यहोशु को यह रहस्य बताया था. जो अब हमारे लिए कोई रहस्य नहीं है. कि व्यवस्था की पुस्तक तेरे चित्त से कभी न हटने पाए इस पर दिन रात ध्यान किये रहना क्योंकि ऐसा करने से तू सफल होगा और प्रभावशाली होगा. (यहोशु 1:9)

23. यह हमें परिपक्व बनाती है.

जो भी प्रभु यीशु पर विश्वास करता है वो परमेश्वर की सन्तान बन जाता है. (यूहन्ना 1:12) लेकिन उस समय वह सबकुछ नहीं जानता वह एक नया जन्म पाया हुआ शिशु के समान होता है जिसे वचन रूपी शुद्ध दूध की आवश्यकता होती है और धीरे धीरे जब वह वचन को ग्रहण करता है पढता है उस में जड़ पकड़ता है और बढ़ता जाता है वह परिपक्व हो जाता है. (इब्रानियों 5:13, 14)

24. यह हमारे विचारों को सुरक्षित रखती है.

परमेश्वर का वचन न केवल शान्ति देता है बल्कि हमें और हमारे विचारों को सुरक्षित भी रखता है. बाइबिल परमेश्वर का वचन है इसे पवित्रात्मा के द्वारा प्रेरणा पाकर लिखा गया है. इसे पढ़ने से पहले यदि कोई प्रार्थना करता है तो पवित्रात्मा उसकी मदद करता है और उसके विचारों को सुरक्षित रखता है.

25. यह हमें संवृद्ध (सम्पन्न) बनाती है.

जो व्यक्ति बुराई से अलग रहता है और परमेश्वर के वचन में आनन्दित रहता है वह उस पेड़ के समान है जो नदियों के किनारे लगाया गया है. उसके पत्ते कभी नहीं मुरझाते और ऐसा व्यक्ति जो कुछ भी करता है उसमें उसे सफलता मिलती है और वह सम्पन्न और संवृद्धशाली हो जाता है. (भजन 1:1-4)

https://biblevani.com/

पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)

[email protected]

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