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मन को नया करने के सात उपाय | 7 Steps to Renew Your Mind

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दोस्तों आज हम बात करेंगे हम अपना मन कैसे नया कर सकते हैं जिसमें हम सीखेंगे बाइबल के अनुसार मन को नया करने के सात उपाय | 7 Steps to Renew Your Mind.

मन को नया करने के सात उपाय | 7 Steps to Renew Your Mind

संत पौलुस रोमियो की कलीसिया को पत्र लिखते समय उन्हें एक बहुत सामर्थी निर्देश देते हैं कि यदि तुम्हारा मन या बुद्धि नई हो जाती है तो तुम्हारा सबकुछ बदल जाएगा.

इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो. (रोम. 12:2)

मन क्या है ? | मन की शान्ति क्या है

हम जो कुछ भी करते हैं या निर्णय लेते हैं वो सब कुछ मन पर ही निर्भर है. परमेश्वर का वचन कहता है मन सबसे अधिक धोखा देने वाला है जिसमें असाध्य रोग लगा हुआ है.

इसलिए परमेश्वर से हमें प्रार्थना करना चाहिए कि हमारा मन नया हो जाए. पौलुस भी यही कहते हैं तुम्हारे मन के नए हो जाने से तुम्हारा चालचलन भी बदलता जाए.

यदि आप किसी का मन पढ़ना या जानना चाहते हैं, तो आप उसकी बातों को ध्यान से सुनिए. जो मन में होता है वही मुंह से निकलता है.

एक भला व्यक्ति अपने भले मन के भण्डार से भली बातें निकालेगा और एक बुरा व्यक्ति अपने बुरे मन से बुरी या बुराई ही निकालेगा.

और हम जानते हैं जैसा हम अपने मन में लगातार विचार करते हैं वैसे ही हम हो जाते हैं. (नीतिवचन 23:7)

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पढ़ें – आत्मिक जागृति के चिन्ह

राष्टपिता महात्मा गांधी जी ने एक बार कहा था, मैं किसी भी व्यक्ति को अपने मन में गंदे पाँव से प्रवेश करने और चलने नहीं दूंगा.

राष्टपिता महात्मा गांधी जी
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हम कैसे अपने मन को नया कर सकते हैं

परमेश्वर का वचन पवित्रशास्त्र में मन के विषय में बहुत कुछ दिया गया है. यहाँ हम 7 ऐसे मुख्य वचनों और तथ्यों पर चर्चा करेंगे जिसे करने से हमारा मन नया हो सकता है और उत्तम रीती से क्रियान्वित होकर स्वयं के लिए एवं समाज के लिए हमारे जीवन को आशीषित कर सकता है.

1. मन को परमेश्वर पर केन्द्रित करके (यशायाह 26:3)

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है. परमेश्वर ही हमारे मन को भटकने से रोकने का उपाय है. यदि हम परमेश्वर पर पूरा भरोषा करते हुए धीरज धरेंगे तब परमेश्वर हमें अलौकिक अद्भुत शान्ति प्रदान करते हैं.

2. हर बात में प्रार्थना करने की आदत विकसित करें (फिली. 4:6-7)

किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएं. तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे (मन) हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी.

किसी काम में मन नहीं लगने के कारण यही है क्योंकि हमारा मन बहुत बात की चिंता करता है. लेकिन यदि हम उस चिंता से मुक्त होना चाहते हैं तो धन्यवाद करते हुए प्रार्थना करें मन भी लगेगा और सफलता भी मिलेगी.

3. परमेश्वर के वचन में जड़ पकते जाएं (कुलु. 2:6)

सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो. और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्त धन्यवाद करते रहो.

जब हम पवित्रशास्त्र को ध्यान से पढ़ते हैं और उस पर मन लगाते हैं तो उन वचनों में हमें मन को खुश रखने का उपाय और मन को शांत करने वाले विचार मिलते हैं, एवं सुकून और तसल्ली मिलती है.

4. मन में सकारात्मक विचार भरें (फिली. 4:8)

निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं,

और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्हीं पर ध्यान लगाया करो. हम किसी भी विचार को बार बार दोहरा कर अपने अवचेतन मन में भर सकते हैं.

5. बुद्धिमानो से मित्रता और संगति करें (नीतिवचन 13:20)

बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा. कहते हैं जैसे संगत वैसी रंगत.

बुरी संगती अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है. इसलिए मित्रता सोच-समझ कर और परमेश्वर के लोगों के साथ ही करें.

6. प्रसन्नता से वचन में ध्यान और मनन के लिए समय निकालें (भजन 1:2)

परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है. परमेश्वर का वचन मार्ग की ज्योति है जीवन की रोटी है.

जो अपना समय इसमें लगाता है उसका मन नया होता है और ऐसा व्यक्ति जिस काम में हाथ लगाता है वह सफल होता है. परमेश्वर के वचनों में मन को शांति देने वाले विचार भरे हुए हैं.

7. पवित्र आत्मा की सहायता माँगना (यूहन्ना 14:26)

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा.

यदि आप सोचते हैं आपका मन शांत क्यों नहीं रहता या दिमाग को एक जगह कैसे रखें तो याद रखें. पवित्र आत्मा हमारा प्रिय परमेश्वर एवं सहायक है

जब भी हम उससे सहायता मांगते हैं तो वह क्रियान्वित हो जाता है और हमारी सहायता करता है, और सब कुछ नया कर देता है.

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Conclusion | निष्कर्ष

शांत मन के फायदे अनेक हैं जब हम परमेश्वर के वचनों को पढ़ते और मनन करते और उसे अपने जीवन में लागू करते हैं तो हमारा मन आशा से और उम्मीद से भर जाता है. हम उपयोगी और लाभकारी कार्यों को करने का निर्णय लेने लगते हैं. यदि आपको लगता है काम करने में मन नहीं लगता तो क्या करें. तो उपरोक्त बातों को अवश्य प्रयोग में लाएं.

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पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं) rajeshkumarbavaria@gmail.com

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