Powerful Easter Message in hindi | यीशु मसीह ने उन 40 दिनों में क्या सिखाया था

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पुनरुत्थान मसीही जगत में एवं बाइबल में बहुत महत्वपूर्ण है आज हम इस संदेश को पढेंगे Powerful Easter Message in Hindi जिसमें हम जानने की कोशिश करेंगे यीशु मसीह ने पुन: जीवित होकर उन 40 दिनों में लोगों को क्या सिखाया था.

Easter Message in Hindi

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पढ़िए Easter क्या है सम्पूर्ण शिक्षा

वास्तव में ईस्टर में अंडा या चिकिन से कोई लेना देना नहीं है जिस प्रकार आजकल लोग इसे मना रहे हैं. ईस्टर अर्थ है यीशु मसीह का पुनरुत्थान मतलब यीशु मसीह का मरे हुओं में से जी उठना. यह मसीह जगत में बहुत बड़ी आशा की बात है. क्योंकि जो कुछ यीशु ने कहा वो सब कुछ पूरा हो रहा है और वो स्वयं मर कर जी उठा तो उस पर विश्वास करने वाले लोग भी मरेगे तो उसके आगमन पर जी उठेंगे और उसके साथ अनंत काल तक रहेंगे.

प्रभु यीशु ने मुरदों में से जी उठकर अपने स्वर्गारोहण के दिन तक बहुत से लोगों के बीच बहुत से काम किये बाइबल में लूका 24:1-53 इसका वर्णन पाया जाता है आज हम उन भागों से सीखेंगे की प्रभु यीशु ने उन चालीस दिनों में क्या सिखाया.

यीशु मसीह ने सिखाया उनके पास धरती और स्वर्ग का सारा अधिकार है इसलिए सुसमाचार सुनाओ

जी उठने के बाद यीशु ने अपने चेलों के पास आकर कहा, देखो धरती और स्वर्ग का सारा अधिकार मुझे दिया गया है इसलिए तुम जाओ और सारे जगत के लोगों को सुसमाचार सुनाओ चेले बनाओ और पिता पुत्र पवित्र आत्मा के नाम पर बप्तिस्मा दो और उन्हें सब बातें मानना सिखाओ जो मैंने तुम्हें सिखाई है और देखो जगत के अंत तक मैं सदा तुम्हारे संग हूँ. (मती 28:18-20)

अत: अब यीशु आत्मा में एक ही समय में सभी जगह हो सकते हैं. उन्होंने कहा, जहाँ दो या तीन लोग मेरे नाम से एकत्र होते हैं मैं उनके बीच में होता हूँ. इसलिए सुसमाचार सुनाने का काम हमें स्वयं यीशु मसीह के द्वारा मिला है, जिसके पास स्वर्ग और धरती दोनों का सारा अधिकार है.

यीशु मसीह ने सिखाया सुसमाचार सुनाने के लिए पवित्रात्मा की जरूरत है

यीशु मसीह ने कहा, और देखो, जिस की प्रतिज्ञा (पवित्रआत्मा की) मेरे पिता ने की है, मैं उस को तुम पर उतारूंगा और जब तक स्वर्ग से सामर्थ न पाओ, तब तक तुम इसी नगर में ठहरे रहो. (लूका 24:49) पवित्र आत्मा जब तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे और मेरे गवाह होगे मतलब सुसमाचार सुनाने वाले होगे.

यरूशलेम में अर्थात अपने क्षेत्रों में, सारे यहूदिया में अपने आस पास, और सामरिया में मतलब पास के गावों या शहरों में और जगत के छोर तक. सुसमाचार सुनाने और प्रभु के गवाह होने की सामर्थ प्रभु पवित्र आत्मा ही देता है. (प्रेरितों के काम 1:8)

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यीशु मसीह ने सिखाया वो स्वयं सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र के केंद्र बिंदु हैं

यीशु मसीह के जी उठने के तुरंत बाद यीशु मसीह किसी राजा के घर में या जिन्होंने उन्हें सताया था और क्रूस पर चढ़ाया था उनके पास नहीं गए बल्कि वो अपने चेलों के पास गए और उनके दो अनुयायी शिष्य अपने घरों की ओर जा रहे थे वे बातें करते हुए जा रहे थे….(लूका 24:13-17)

निराश होकर कि अब तो शायद सब कुछ समाप्त हो गया. हमारा मसीहा मर गया. अब हमारे लिए कोई आश नहीं है. अचानक यीशु उनके बीच में प्रगट होकर उसने ही साथ साथ चलने लगे. और उन्हें सच्चाई बताने की मनसा से उनसे सवाल करने लगे. कि तुम किसकी बातें करते हुए जा रहे हो.

वे लोग भी बड़े नादानी से सहज भाव से कहने लगे पूरे शहर को पता है क्या तू है अकेला है जिसे नहीं पता क्या हुआ? यीशु मसीह के विषय में जो सीधा व्यक्ति था, और उसे क्रूस पर चढ़ा दिया गया. तब यीशु मसीह ने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके सारे पवित्र शास्त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया (लूका 24:27)

कि किस प्रकार सभी भविष्यवक्ता लोग और पवित्र शास्त्र की सभी पुस्तकें केवल यीशु के विषय में ही बताती हैं. उसने उन्हें कहा हे विश्वास करने में मंदमतियों अर्थात विश्वास करने में धीमे व्यक्तियों सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र के केंद्र बिंदु यीशु ही हैं.

यीशु मसीह ने सिखाया कि उनका दुःख उठाना और जी उठाना और स्वर्गारोहण बहुत जरूरी था. (लूका 24:26)

लुका चरित सुसमाचार के 24:26 में लिखा है यीशु मसीह ने कहा था, क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे? अर्थात यीशु मसीह का दुःख भोगना, कोड़े खाना और मरना और जी उठाना यह कोई संयोग या दुर्घटनावश नहीं हुआ था यह होना अवश्य था जरुरी.

ताकि सारी मानव जाति के लिए एक आशा हो. और जो कोई उस पर विश्वास करे वो अनंत जीवन को प्राप्त करे. इसलिए ईस्टर या पुनुरुत्त्थान का दिवस मसीह जगत में बहुत ही आशीष और आशा दिलाने वाला दिन है.

लूका 24:46 में लिखा है तब उस ने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी. होने पाए आज भी प्रभु अपने अनुग्रह से हमारी आँखे खोल दे ताकि हम भी उसके वचनों की गूढ़ भरी बाते समझ ले.

यीशु मसीह ने सिखाया कि बपतिस्मा बहुत जरूरी है (मत्ती 28:19)

प्रभु यीशु मसीह ने जी उठने के पश्चात स्वर्गारोहण के ठीक पहले एक आदेश दिया जिसे हम सभी महान आदेश भी कहते हैं उसमें एक आदेश है सारे जगत में जाकर लोगों को बपतिस्मा दो. इसका तात्पर्य यह है कि बपतिस्मा एक सबसे महत्पूर्ण विधि है. जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा. (मरकुस 16:16) उन 40 दिनों में यीशु इस शिक्षा को भी लोगों के बीच में दृढ करना चाहते थे. और उन्होंने ऐसा किया भी.

यीशु मसीह ने सिखाया कि जैसा उनका स्वर्गारोहण है उसी प्रकार उनका पुन:आगमन भी होगा (प्रेरित 1:8-11)

प्रभु यीशु मसीह ने 40 दिन लोगों को बहुत से चिन्ह दिखा दिखाकर उन जो बातें सिखाई थी उन्हें प्रमाणित करते रहे. फिर उनके कहे अनुसार वे बादलों में उठा लिए गए. और लोगों के नजरों से आसमान में ओझल हो गए. लेकिन उनके चेले बादलों में आँखे लगाए ही रहे.

कि शायद बिलकुल अभी यीशु वापस आयेंगे लेकिन तभी प्रभु यीशु ने स्वर्गदूतों को भेजा और उन स्वर्गदूतों उन चेलों से कहा, हे गलीली पुरूषों, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा. (प्रेरित 1:11)

Conclusion

इसका अर्थ है प्रभु की सभी बातें पूरी हो रही हैं. जो यीशु ने मती 24 अध्याय में कहीं थी. इसलिए उसका आगमन भी बहुत जल्दी होगा. और बिलकुल वैसा होगा जैसा उसका स्वर्गारोहण बादलों में हुआ था. आज इस Powerful Easter Message in hindi में हमें गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है कि हम उसके आगमन के लिए क्या कर रहे हैं.

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पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)

rajeshkumarbavaria@gmail.com


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