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आज का पवित्र बाइबल वचन संदेश | पौलुस के जीवन से 3 जबरदस्त सीख | What we can learn from life of Paul

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आज का बाइबल वचन
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सभी को जय मसीह की दोस्तों आज का बाइबल वचन हम सीखने जा रहे हैं कि संत पौलुस कैसे अपने जीवन के अंत तक प्रभु की सेवा के लिए बहुत ही उत्साहित थे. मैं विश्वास करता हूँ आज का पवित्र बाइबल वचन संदेश आपके लिए आशीष का कारण होगा.

आज का बाइबल वचन – रोमियो 1:14-16

मैं अपने को यूनानियों और गैर यूनानियों ज्ञानियों और अज्ञानियों के प्रति कर्जदार समझता हूँ, इसलिए मैं आप रोम निवासियों को भी शुभ सुमाचार सुनाने के लिए तैयार हूँ. शुभ समाचार से मैं लज्जित नहीं होता.

पौलुस प्रभु की सेवा को प्रारंभ किये हुए लगभग तीस साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी पौलुस के जीवन में सुसमाचार को सुनाने के प्रति बड़ा उत्साह जोस और उमंग थी वह रोमी की कलीसिया को पत्र लिखते समय इन तीन बातों से प्रारंभ करता है.

  1. मैं कर्जदार हूँ (वचन 14)

2. मैं तैयार हूँ (वचन 15)

3. मैं लज्जित नहीं होता.(वचन 16)

आज हम इन तीन बातों के विषय में सीखेंगे जो पौलुस के जीवन में थे. इन तीन प्रस्ताव को गहराई से सीखेंगे आज बहुत से लोग कुछ वर्षों की सेवकाई से ही थक जाते हैं लेकिन पौलुस कैसे इतनी बड़ी सेवा कर सका और उत्साहित था.

पौलुस के लिए सुसमाचार का प्रचार वैकल्पिक नहीं था अनिवार्य था. वह कहता है मैं जीवित हूँ तो केवल सुसमाचार के लिए ही जीवित हूँ….

1. मैं कर्जदार हूँ ….(वचन 14)

पहली बात पौलुस कहते हैं मैं कर्जदार हूँ, वह रोम के लिए कर्जदार नहीं थे…हालांकि रोम के लोगों ने बहुत अच्छी सड़क बनाए थे जिससे लोग यातायात के साधन सरल हो गए थे. और उनकी कानून व्यवस्था बहुत अच्छी थी.

क्या पौलुस ने किसी से कुछ पैसे लेकर या उधार लेकर वापस नहीं दे पाया था इसलिए कह रहा है कि मैं कर्जदार हूँ…नहीं बल्कि पौलुस के जीवन में परमेश्वर प्रभु यीशु ने कुछ दिया था और वो था तेजोमय सुसमाचार. जो उसे सारी दुनिया में पहुंचाना था.

प्रभु यीशु ने कहा था यह सुसमाचार सभी अन्य जातियों के पास पहुँचाओ उसके लिए पौलुस कर्जदार थे. किसी के पैसे के कर्जदार नहीं बल्कि लोगों तक सुसमाचार सुनाने के लिए कर्जदार. जब तकसुसमाचार पूरी दुनिया तक नहीं पहुँच जाता वे कर्जदार थे.

यदि यह सच है तो हर वो व्यक्ति जो प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता करके ग्रहण किया है और उद्धार का आनन्द प्राप्त किया है तो वह भी कर्जदार है और उसे सभी तक यह उद्धार का सुसमाचार सुनाना है. वह किसके लिए कर्जदार थे.

यूनानियों के लिए गैर यूनानियों के लिए अमीर के लिए गरीब के लिए स्त्री के लिए पुरुष के लिए सभी के लिए कर्जदार थे. हम भी उन सभी के लिए कर्जदार हैं जो अभी तक सुसमाचार नहीं सुना है.

हम चुप नहीं बैठ सकते हैं. हम स्वार्थी नहीं हो सकते हैं, क्या हम कर्जदार रहकर ही अपना जीवन बिताना चाहते हैं. ओsss हम कर्जदार होकर न मरे बल्कि यह आशीषित तेजोमय उद्धार का सुसमाचार सबको सुनाएं….

2. मैं तैयार हूँ ….(वचन 15)

पौलुस अपनी पत्रियों में अनेक स्थानों में यह शब्द दोहराते थे कि मैं तैयार हूँ…अनेकों बार हमें अवसर मिलने पर हम बहाने बनाते हैं कि हम अभी तैयार नहीं हैं… हम सेवा के लिए तैयार नहीं हैं. हमारी उम्र अभी कम है या उम्र ज्यादा है या अभी यह काम है या वो काम है लेकिन पौलुस कहते हैं मैं तैयार हूँ.

पौलुस को जब प्रभु यीशु ने तरसुस के रास्ते मेंदर्शन दिया तब पौलुस ने कहा था प्रभु आप कौन हैं तब प्रभु यीशु ने दर्शन में कहा, मैं यीशु हूँ जिसे तू सताता है. तब पौलुस ने कहा था प्रभु आप क्या चाहते हैं कि मैं क्या करूँ…

वो तैयार था सब कुछ करने के लिए….वो सुसमाचार सुनाने के लिए तैयार था, कष्ट सहने के लिए तैयार था, यात्रा करने के लिए तैयार था, अपने प्राण देने के लिए भी तैयार …यदि हम कर्जदार हैं तो हमें कर्ज को उतारने के लिए लिए भी तैयार रहना चाहिए

सवाल है क्या हम तैयार हैं आज हमारे देश में 2 लाख से ज्यादा गाँव में सुसमाचार नहीं पहुंचा वहां कोई संगती नहीं हैं हर दिन हमारे देश में लगभग 25 हजार से ज्यादा लोग बिना सुसमाचार जाने मर जाते हैं क्या हम उन्हें कम से कम एक बार सुसमाचार सुनाने के लिए तैयार हैं ? एक बड़ा सवाल…

जिन्होंने परमेश्वर के लिए बड़े बड़े काम किये… फिर वो चाहे नया नियम में हो या पुराना नियम या वर्तमान समय. यह सवाल हर एक बड़े परमेश्वर के दास के पास आया था और उन्होंने उसका सकारात्मक जवाब दिया और कहा, मैं तैयार हूँ…

3. मैं लजाता नहीं हूँ ….(वचन 16)

तीसरी बात पौलुस कहते हैं मैं लजाता नहीं हूँ…किस बात से वो नहीं लजाते नहीं थे…सुसमाचार सुनाने से वे लजाते नहीं थे. चाहे लोग कुछ भी बोलें चाहे सुसमाचार के कारण निंदा करें या मारे या गाली दें संत पौलुस लजाते नहीं थे.

दुनिया की सबसे बड़ी आशीष जो परमेश्वर ने मानव जीवन में दी है वह है परमेश्वर का वचन सुसमाचार. यह हमारे घमंड का विषय होना चाहिए. पौलुस कहते हैं यह सुसमाचार की सेवा हमें उसकी दया में मिली हैं.

पौलुस जहाँ कहीं गए उन्हें अपमान मिला और लोगों ने उन्हें जेल में बंदी बना दिया, लोगों ने उन पर पथराव किया. सताव किया गया, लेकिन फिर भी वे कभी सुसमाचार सुनाने से नहीं लजाते थे. कभी नहीं शर्माते थे.

आज बहुत से लोग इस बात से शर्माते हैं या लजाते हैं कि दूसरे लोग क्या कहेंगे या उनके रिश्तेदार क्या कहेंगे. उनके मित्र कहीं उनका बुरा न मान जाएं कि ये तो सुसमाचार पर विश्वास करता है और सुनाता है.

आज भारत में 2000 वर्षों के बाद भी सुसमाचार गावों गावों में नहीं पहुंचा उसका एक कारण यह भी है कि उद्धार पाए हुए लोग सुसमाचार सुनाने से जलाते हैं और प्रभु यीशु की चर्चा करने या अपनी गवाही देने से शर्माते हैं.

आइये प्रभु परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वो हमें पवित्र आत्मा प्रदान करें ताकि हम सामर्थ पाए और सुसमाचार सुनाने के लिए अपने आप को लोगों का कर्जदार समझें और सुसमाचार सुनाने के लिए तैयार हो जाएं और सुसमाचार से कभी न लजाएं….

मैं विश्वास करता हूँ यह आज का बाइबल वचन आपको आशीषित किया होगा ऐसे ही पवित्र बाइबल के वचन पढने के लिए आप मुझे कमेन्ट कर सकते हैं और इस वेबसाईट को लोगों में शेयर कर सकते हैं प्रभु आपको आज के बाइबल संदेश के द्वारा बहुत आशीष दे.

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