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बाइबिल की 20 बेहतरीन कहानियां | Best Bible Stories in Hindi Language

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इस लेख में आप पढ़ेंगे और सुनेंगे – बाइबिल की 20 बेहतरीन कहानियां Best Bible Stories in Hindi Language और बाइबल मेसेज टॉपिक इन हिंदी

सुनिए बाइबल की कहानियां मोनिका की आवाज में

प्रिय मित्र मैं आज आपके लिए लेकर आया हूँ Best Bible Stories in hindi बाइबल की कहानियां जो गागर में सागर को भरती हैं, ये कहानियां इतिहास की वो घटनाएं हैं जिनसे सीख लेकर हम अपना जीवन भलाई के लिए परिवर्तित कर सकते हैं ये pavitra bible ki kahani हैं जिन्हें जो मेरे जीवन में भी बड़ी आशीष का कारण रहीं हैं आशा करता हूँ आपको भी पसंद आएंगी.

पढ़ें :- परमेश्वर को भेंट देने पर तीन अद्भुत कहानियां

बाइबल में ज्ञान के अथाह भण्डार छुपे हुए हैं, प्रभु यीशु ने कहानी के माध्यम से लोगों को स्वर्ग की कठिन बातों को बड़ी ही सरलता से बताया और जीवन के रहस्य को उजागर किया. आज हम उन सारगर्भित घटनाओं एवं शिक्षाप्रद कहानियों को पढ़कर उसे जीवन में लागू करेंगे. तो आइये शुरू करते हैं bible ki kahani hindi mai….

1. कहानी, परमेश्वर दया करता है

हम इस संसार में दो प्रकार के लोगों को देख सकते हैं पहले अमीर, जिन्हें समाज में अच्छा सम्मान मिलता है और दूसरा गरीब का जिसका समाज में कोई स्थान नहीं होता. मरकुस रचित सुसमाचार 10 अध्याय में ऐसा ही गरीब व्यक्ति था जिसका नाम बरतिमाई था, जो गरीब और आँखों से अंधा था. उसे समाज के कुछ लोग तुच्छ मानते और डांटते फटकारते थे.

उसके माता पिता भी उससे प्रेम नहीं करते थे बल्कि उसे भीख मांगने के लिए रास्ते के किनारे छोड़ दिया करते थे एक दिन उसके गाँव के उस उस मार्ग में स्वयं यीशु मसीह अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे. इस भिखारी बरतिमाई ने सुना था यीशु जीवन में चंगाई देता है अंधों को आँख और कोढियों को चंगाई देता है…

इस अवसर को बरतिमाई अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए उसने पुकारा हे दाउद की सन्तान मुझ पर दया कर और यीशु ने रूककर उसे पुकारा और कहा कि तू क्या चाहता है मैं तेरे लिए करूँ और उसने कहा मैं चाहता हूँ की देखने लगूं वह यीशु को देखना चाहता था .

सीख :- आप किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो, यदि आप पूरे मन से विश्वास के साथ अगर आप प्रभु यीशु को पुकारते हैं, तो निश्चय प्रभु यीशु आपकी पुकार को सुनेंगे और आपकी सहायता करेंगे.

पढ़ें : यीशु मसीह कौन हैं ?

2. कहानी, परमेश्वर आपको जानता है

लूका 19 अध्याय में, Yeshu masih ki kahani पाते हैं जहाँ एक जक्कई नामक एक व्यक्ति चुंगी लेने वालों का मुखिया था, जो अन्याय से धन कमाता था. उसके पापों के कारण लोग उसे घृणा की दृष्टि से देखते थे. उसके पास धन और दौलत थी लेकिन ख़ुशी नहीं थी. सच्चा आनन्द नहीं था. वह पैसों के साथ बहुत ही अकेला महसूस करता था. लोग उसे शायद बौना पापी और कहकर पुकारते थे क्योंकि वह नाटा था. कोई भी उसके साथ रिश्ता नहीं रखना चाहता था.

यह सब जानते हुए भी एक दिन स्वयं यीशु उसके गाँव में आया. लोगों की बड़ी भीड़ यीशु के चमत्कारों को देखने के लिए उमड़ पड़ी. जक्कई ने भी सोचा मैं यीशु को देखूंगा लेकिन भीड़ की बहुतायत के कारण और लोगों से छिप कर यीशु को देखने की चाहत में वह गूलर के पेड़ पर चढ़ गया. लेकिन यह क्या यीशु तो स्वयं उसके पास आकर उसका नाम लेकर पुकारने लगा….जक्कई जक्कई नीचे उतर आ आज मैं तेरे घर आऊंगा. यह सुनकर वह आनन्द से भर गया और उसी दिन से उसका जीवन बदल गया.

सीख :- आप कैसी भी परिस्थिति में क्यों न हो परमेश्वर आपको जानता है और आपको नाम लेकर पुकारता है.

3. कहानी, परमेश्वर पापों से छुटकारा देता है…

यूहन्ना 4 में एक सामरी स्त्री थी जिसे समाज ने पाप के दलदल में धकेल दिया था, उस स्त्री को किसी ने सच्चा प्यार नहीं दिया उसे पांच पति छोड़ चुके थे…..इस पाप के कारण वह बड़ी घुटन भरी जिन्दगी जी रही थी. समाज से अलग, लोगों से छिप कर अपना जीवन बिता रही थी. वह स्वयं भी उस पाप भरी जिन्दगी को अपना सब कुछ मान ली थी. क्योंकि वह अब जिस व्यक्ति के साथ जीवन बिता रही थी और रह रही थी वह उसका पति नहीं था.

यह स्त्री छिप कर दोपहर के समय पानी भरने आया करती थी जब सभी अपने अपने घरों में रहते थे. सामान्य रूप से लोग सुबह या शाम को पानी भरने कूएँ में आते थे. एक दिन जब वह दोपहर को पानी भरने आई तब यीशु मसीह भी उसके गाँव आये और उससे पानी मांगने के बहाने बातें करने लगे. और उस स्त्री की सभी बातें प्रगट कर दिए और उसे उसके पापों से छुटकारा दे दिया.

उस स्त्री ने सारे गाँव में जाकर सभी लोगो को बताया की ये ही मसीहा हैं जो पापों से छुटकारा देते हैं

सीख :- प्रभु यीशु हमारे सभी पापों से हमें छुटकारा दिला सकते हैं.

पढ़े :- यीशु की प्रार्थना

4. कहानी, परमेश्वर हमें बचाता है...

शद्रक मेशक और अबेदनगो नामक तीन जवान मित्र थे जो बेबीलोन देश में बंधुए थे वे तीनों जीवित परमेश्वर यहोवा को मानने वाले लोग थे. एक दिन बेबीलोन का राजा नबूकदनेस्सर ने एक सोने की मूर्ती बनवाई और सभी देशवासियों से कहा इस सोने की विशाल प्रतिमा की पूजा करो और आदर में इसके सामने झुककर दंडवत करो.

देश के सभी लोग क्या गरीब क्या अमीर और बड़े छोटे सभी लोगों ने राजा की आज्ञा पर उस मूर्ति को दंडवत किया लेकिन ये तीन जवान पुरुषों ने इस मूर्ति को दंडवत करने से इंकार कर दिया. तब राजा ने क्रोध में आकर एक आग का भट्टा जलवाया और कहा यदि तुम इस मूर्ति को दंडवत नहीं करोगे तो तुम तीनों को इस आग से जलते हुए भट्टे में जीवित जला दिया जाएगा. लेकिन तीनों ने उत्तर दिया हे राजा हम जानते हैं हमारा परमेश्वर हमको बचाएगा लेकिन यदि नहीं भी बचाए तो सुन हे राजा हम तेरी इस मूर्ति को दंडवत नहीं करेंगे.

तब राजा ने आदेश दिया उन तीनों को आग के भट्टे में डाल दिया जाए. जब उन्हें आग में डाला जा रहा था तब डालने वाले जल मरे लेकिन इन तीनों को आग से कुछ भी हानि नहीं हुई बल्कि परमेश्वर के पुत्र समान कोई उनके साथ आग में टहलने लगा. इस रीति से वे तीनो आग से बच गए और राजा को भी पश्चाताप हुआ. और वह जान गया कि परमेश्वर अपने लोगों को अद्भुत रीती से बचाता है. (दानिएल 3:16)

सीख :- परमेश्वर अपने विश्वास करने वालों को अद्भुत रीति से बचाता है.

पढ़ें : हिंदी सरमन आउटलाइन

5. कहानी, परमेश्वर उपाय करता है… | यहोवा की कहानी

परमेश्वर ने अब्राहम नामक व्यक्ति को ऊर देश से बुलाया और उससे वायदा किया कि, मैं तुझे आशीष दूंगा और दुनिया के सारी जातियां तेरे द्वारा आशीष पाएंगी. अब्राहम को केवल परमेश्वर के वायदे पर विश्वास करना था. अब्राहम को इस वायदे को पूरा होने में 100 वर्ष बीत गये. 100 साल बाद अब्राहम को परमेश्वर ने एक पुत्र सन्तान के रूप में इसहाक को दिया. जब इसहाक थोड़ा बड़ा हुआ तब परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा की और उस बेटे से जिससे अब्राहम बेहद प्यार करता था बलिदान करने चढ़ाने को कहा.

अब्राहम अपने परमेश्वर से प्रेम को दिखाने के लिए अपने उस बेटे को बली देने के लिए चल पड़ा और एक हाथ में तलवार लिया था और लकड़ी अपने बेटे के ऊपर रख दिया और पर्वत पर अपने ही बेटे को चढ़ाने को चल दिया. तब बेटे ने कहा पिताजी लकड़ी है और आग भी लेकिन बली के लिए मेमना कहाँ है तब पिता ने कहा…”परमेश्वर उपाय करेगा”. यहोवा यीरे..

तब परमेश्वर ने सचमुच अब्राहम को अपने बेटे को मारने नहीं दिया बल्कि एक मेमना उस पर्वत में प्रदान किया जो झाड़ी में फंसा हुआ था.

सीख :- परमेश्वर अपने आज्ञा मानने वालों के लिए सबकुछ प्रदान करता है.

पढ़ें : कभी हिम्मत न हारें

6. कहानी, परमेश्वर प्रेम करता है… | बाइबल की कहानियाँ इन हिंदी

प्रभु यीशु ने लूका 15 में एक कहानी सुनाई कि एक जमीदार पिता के दो पुत्र थे. छोटे पुत्र ने एक दिन अपने पिता से संपत्ति से अपना भाग मांग कर उस संपत्ति को दूर देश जाकर कुकर्म में उड़ा दिया. और उस देश में जब अकाल पड़ा तो उसके पास न तो खाने को था और न कुछ अच्छा पहनने को. उसके पास कोई जॉब भी न था वह भूखा होकर सूअर चराने तक को राजी हो गया.

एक दिन वह जब भूख के मारे सूअर की फल्ली खाने की सोच रहा था तभी उसे याद आया कि उसके पिता के घर में तो नौकरों को भी अच्छा खाने को मिलता है. उसने विचार किया मैं अपने पिता के पास वापस लौट जाऊँगा और एक नौकर के समान ही अपने पिता के घर में जाकर रहूँगा. जब वह अपने पिता के घर आया तो उसके बूढ़े पिता ने दौड़कर उसे गले लगाया और उसके लिए बड़ी दावत दी और नए कपड़े पहनाया. उसका स्वागत पूरे दिल से किया और उसकी सोच से बढ़कर फिर से पिता का प्यार दिया.

सीख :- हमारे पिता के घर में हमारी सोच से ज्यादा भरपूरी है वो हमसे प्यार करता है.

कहानी नम्बर 7-9

7. कहानी, परमेश्वर विजय दिलाता है …

2 कुरुन्थियों 2:14 परमेश्वर का धन्यवाद हो जो हमें मसीह में सदा जय के उत्सव में लेकर चलता है..2 इतिहास 20 अध्याय में यहोशापात नामक एक राजा था. जो परमेश्वर का भय मानता था एक दिन तीन शत्रु सेनाओं ने एक साथ उसके राज्य पर चढाई कर दी. यह सुनकर यहोशापात डर गया. जो कि स्वाभाविक ही था.

लेकिन वह परमेश्वर के पास गया और प्रार्थना करने लगा और अपने पूरे देश में उपवास की घोषणा करवा दी. वह लगातार परमेश्वर की दोहाई देता रहा और प्रार्थना करता ही रहा. तब परमेश्वर ने यहजिएल नामक व्यक्ति के द्वारा यहोशापात को यह कहला भेजा कि तुम डरो मत क्योंकि अब युद्ध यहोवा परमेश्वर का है …तुम्हें लड़ना भी न पड़ेगा और तुम विजयी हो जाओगे.

तब राजा यहोशापात उन तीन सेनाओं से लड़ने के लिए हथियार नहीं बल्कि गाजे बाजे के साथ आराधना करते हुए निकला और जीत भी गया क्योंकि उन सेनाओं ने अपने आपस ही लड़कर मर मिटे.

सीख :- परमेश्वर पर भरोषा करने वालों को परमेश्वर विजयी करता है.

पढ़ें : प्रार्थना के 20 फायदे

8. कहानी, परमेश्वर दर्शन को पूरा करता है…

मैं तेरे विषय में जो योजनाएं (कल्पनाएँ) बनाता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ वो हानि की नहीं वरन लाभ ही की हैं और अंत में तेरी आशा पूरी करूंगा.

(यिर्म 29:11)

हम bible utpatti ki kahani में एक कहानी पाते हैं एक बालक जिसका नाम युसुफ था, अपने पिता के 12 पुत्रों में सबसे छोटा था लेकिन परमेश्वर ने उसे एक दर्शन दिया की उसके आनाज के बंधे हुए पूले के सामने उसके भाइयों के पुले झुक कर दंडवत कर रहे हैं और यह बात उसके भाइयों को बुरी लगी जिसके कारण एक दिन उसे अकेला पाकर उन्होंने उसे मार डालने की योजना बनाई. परन्तु तभी उनहोंने देखा कि मिश्र देश को एक धनी व्यक्तियों का काफिला जा रहा है. उनहोंने उन धनी लोगों को अपना ही भाई दास के समान बेच दिया. युसुफ के ऊपर उस देश में बड़ी यातनाएं आयीं यहाँ तक कि उसके ऊपर झूठा आरोप लगाकर जेल (कैदखाने) में भी डाल दिया गया.

लेकिन इन सारे वर्षों में युसुफ अपने दर्शन को और अपने परमेश्वर को नहीं भूला और एक दिन परमेश्वर ने उसे वहां के राजा का स्वप्न का अर्थ बताने में मदद किया और राजा ने उसके कारण उसे पूरे देश का प्रधानमंत्री बना दिया. जिसके कारण फिर उसके भाई लोग भी उसके पास अनाज मांगने आये क्योंकि सारे देशों में आकाल था और इस रीति से दर्शन की बातें पूरी हो गई.

सीख : परमेश्वर दर्शन की बातें पूरी करता है.

पढ़ें : पवित्र बाइबल नया नियम का इतिहास

9. कहानी, परमेश्वर पुन: अवसर देता है…

बाइबिल की कहानी में हम yona nabi ki kahani पाते हैं. महान परमेश्वर के एक भविष्यवक्ता दास योना से जो यहूदी था, परमेश्वर ने कहा, “नीनवे नामक देश में जा, जो समुद्र के पार है और उसमें प्रचार कर ताकि वे अपने पापों के कारण नाश न हो जाएं. यदि वे पाप करते ही रहे तो नाश हो जायेंगे. और उसी पाप में पड़े रहे तो 40 दिनों में उसे परमेश्वर पलट देगा एवं नाश कर देगा. यह भविष्यवक्ता जाने के लिए उठता तो है लेकिन नीनवे नहीं बल्कि विपरीत दिशा में अर्थात तरसीस नामक स्थान में पैसे देकर समुद्र के रास्ते चला. लेकिन मार्ग में परमेश्वर ने उसे सबक सिखाने के लिए आंधी तूफ़ान भेजा, तब भी योना नहीं माना वह अन्य जातियों को बचाना नहीं चाहता था. जहाँ लगभग 1 लाख बीस हजार लोग थे. परमेश्वर एक अधर्मी को भी नाश होने देना नहीं चाहता. परमेश्वर ने उसे एक विशाल मछली के पेट में डाल दिया…मछली को भविष्यवक्ता को खाने की आज्ञा नहीं थी. लेकिन जब योना भविष्यवक्ता ने माफ़ी मांगी तब परमेश्वर ने अपने दास भविष्यवक्ता योना को एक और अवसर दिया ताकि परमेश्वर की सेवा पूरी की जा सके. और हम देखते हैं उसके एक प्रचार से पूरा का पूरा नीनवे देश बचाया गया.

सीख : परमेश्वर अपनी दया से एक और अवसर प्रदान करता है.

सुने: ऑडियो शोर्ट सरमन (बाइबिल की लघु कहानियां)

बाइबल की लघु कथा

10. कहानी, परमेश्वर प्रोत्साहित करता है…

परमेश्वर का एक नम्र दास था मूसा, जिसे हम पाते हैं Musa ki kahani में. मूसा अपने इस्राएली लोगों को बंधुआई से छुडाने के लिए जो कर सकता था कर चुका था. यहाँ तक कि उसने एक मिस्री की हत्या भी कर दी थी लेकिन उससे काम नहीं बना बल्कि उसे मिश्र देश छोड़कर भागना पड़ा और 40 वर्षों तक जंगल में अपने ससुर की भेड़ बकरियां चराता था. लेकिन एक दिन परमेश्वर ने अपने लोगों की दोहाई और कराहना सुनकर उतर आया और उन्हें छुडाने के लिए, आजाद करने के लिए मूसा के पास जंगल में आया. और एक जलती हुई झाड़ी जो भस्म नहीं हो रही थी उस आग में से मूसा को पुकारा और कहा मैं तुझे उसी मिश्र में भेजना चाहता हूँ.

जो तेरे दिल की चाहत थी कि अपने लोगों को आजादी दिलाने की. वो अब तेरे द्वारा ही पूरा करना चाहता हूँ. लेकिन मूसा डर गया और कहने लगा मुझे तो बोलना भी नहीं आता. मैं तो बोलने में हकला हूँ क्योंकि इतने वर्षों में वह भेड़ बकरी चराने के कारण उसकी आवाज ऐसी ही हो गई थी. लेकिन परमेश्वर ने उसे प्रोत्साहित किया और कहा जा मैं तुझे मिश्र में यहोवा सा सामर्थ देकर भेजता हूँ परमेश्वर अपनी महिमा किसी को नहीं देता लेकिन परमेश्वर ने मूसा हो सामर्थ देकर प्रोत्साहित किया और अपने लोगों को आजाद करवाया.

सीख : परमेश्वर आपके द्वारा दुसरो को आशीष देने हेतु आपको प्रोत्साहित करता है.

पढ़ें : आदर्श पत्नी के 7 गुण

11. कहानी, परमेश्वर हमें हियाव देता है… | Hindi bible stories

परमेश्वर का एक दास मूसा जो पूरी दुनिया में सबसे नम्र था लगभग 21 लाख इस्राएलियों की अगुवाई कर रहा था. प्रतिज्ञा के देश कनान में प्रवेश करने से पहले वह मर गया तब उस पूरी बड़ी मंडली का अगुवा परमेश्वर ने मूसा के दास यहोशु को बनाया. लेकिन यहोशु घबरा गया और उसका मन कच्चा होने लगा वह सोचने लगा यह कैसे हो सकता है कि मैं इतनी बड़ी भीड़ की अगुवाई करूं. तब परमेश्वर ने उसे एक रहस्य बताया और उसका हियाव बंधाया. परमेश्वर ने कहा यहोशु मत घबरा तेरा मन कच्चा न हो देख मैं जैसे मूसा के संग रहा हूँ तेरे भी संग रहूँगा…बस इतना कर जो व्यवस्था (परमेश्वर का वचन) मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उस पर दिन रात मनन करना, उससे दायें या बाएं मत मुड़ना ऐसा करने से तू सफल होगा और प्रभावशाली भी होगा. मेरे वचन के अनुसार चलने से जिस स्थान में तू कदम रखेगा वो स्थान मैं तुझे दे दूंगा और जीवन भर कोई तेरे सम्मुख खड़ा होने न पाएगा. और परमेश्वर के वचन के अनुसार यहोशु के साथ ऐसा ही हुआ.

सीख : परमेश्वर अपने वचन के द्वारा हमें हियाव प्रदान करता है.

पढ़ें : एक आदर्श मसीही परिवार

12. कहानी, परमेश्वर पूर्ति करता है

एक बार प्रभु यीशु की माता के रिश्तेदारों में काना नगर में विवाह सामारोह हो रहा था, जिसमें प्रभु यीशु और उसके चेले भी निमंत्रित किये गए थे. सब कुछ बढ़िया चल रहा था लेकिन तभी जैसा कि अक्सर विवाह में कुछ न कुछ कमी हो जाती है इस विवाह में भी दाखरस जो कि यहूदियों के रीतिरिवाज में एक मुख्य पेय था. घट गया. यह एक बड़ी लज्जा की बात उस विवाह के परिवार के लिए हो सकती थी. तभी यीशु की माता मरियम यीशु के पास आकर बोली, “इनके पास दाखरस नहीं रहा, लेकिन प्रभु यीशु ने कहा मेरा समय अभी नहीं आया. क्योंकि प्रभु अपने पिता परमेश्वर की आज्ञा पर ही सब कुछ करते थे. तब यीशु की माता ने वहां खड़े सेवकों से कहा, “जैसा यीशु कहेंगे वैसा ही करना”. तब थोड़ी देर बाद यीशु ने उन दासों से कहा, इन बड़े बड़े जारों में जो हाथ मुंह धोने को पानी भरा जाता है उन्हें पानी से भर दो और जब पानी भर दिया गया तो उसने उन्हें आज्ञा दी इसे भोजन के प्रधान के पास लेजाकर चखाओ और वो सारा का सारा पानी दाखरस बन चूका था.

सीख : परमेश्वर हर कमी घटी में पूर्ति करता है.

पढ़ें : आज का बाइबल मनन

13. कहानी, परमेश्वर समस्या का समाधान करता है…

एस्तेर नामक खुबसूरत लड़की को रानी बनाने के लिए क्षयर्ष राजा ने अपने महल में बुलवाया. एस्तेर महल के सुंदर सुंदर बेलबूटे और सुन्दरता को देख रही थी. एस्तेर का चचेरा भाई मोर्दकै था जो इसी देश में बंधुआ था. जिसे बाद में राजा के राजमहल में एक पहरेदार की नौकरी मिल गई थी. ये दोनों थे मतलब केवल परमेश्वर यहोवा को ही दंडवत करते थे और किसी को नहीं. लेकिन उसी नगर में एक मंत्री थी था जिसका नाम हामान था वह बड़ा ही दुष्ट था और किसी भी तरह राजा बनना चाहता था.

वह सबसे कहता उसे दंडवत करो. लेकिन मोर्दकै उसे कभी दंडवत नहीं करता था जिसके कारण उसने मोर्दकै से इस बात का बदला लेने के लिए पचास हाथ का खंबा बनवाया था और उसके ऊपर फांसी का फंदा लगवाया था, ताकि मोर्दकै को उसमें दंड दे सके. हामान को जब यह पता चला कि ये यहूदी जाति का है तो उसने उसकी सारी जाति को मार डालने की राजा से धोके से ले ली थी. लेकिन जब एस्तेर को यह पता चला और वह जब रानी बन चुकी तो उसने एक दिन प्रार्थना और उपवास के साथ राजा को सब कुछ बता दिया कि मैं यहूदी हूं और यह हामान हमारी जाति पर संकट बना हुआ है.

तब जब हामान को पता चला तो वह रानी के के पास गया जो अपने बिस्तर पर बैठी थी…वो तो माफी मांगने जा रहा था लेकिन राजा ने पीछे से देखा तो समझा यह रानी के साथ जबरदस्ती कर रहा है और तुरंत राजा की आज्ञा से वह कैद कर लिया गया और उसी फंदे में जो उसने मोर्दकै के लिए बनवाया था मृत्यु दंड को पाया.

सीख : परमेश्वर प्रार्थना में समाधान निकालता है.

पढ़ें : हिंदी बाइबल स्टडी नोट्स

14. कहानी, परमेश्वर संकट से उबारता है…

परमेश्वर के लोग (इस्राएलियों) ने जब पाप करते ही रहे तब परमेश्वर ने उन्हें सिखाने के लिए सात वर्षों के लिए मिद्यानियों के हाथ सौंप दिया. वे लोग इस्राएलियों को सताते थे और जितनी भी फसल होती वे लोग काट के ले जाते और बाकी नष्ट कर देते थे. ऐसे घोर संकट में एक इस्राएली व्यक्ति जिसका नाम गिदियोन था वह मिद्यानियों के डर के मारे छुप कर दाख के कुंड में जहाँ अंगूर का रस निकाला जाता था वहां गेंहू को साफ़ कर रहा था. तब परमेश्वर ने एक स्वर्गदूत को भेजकर उससे कहा हे शूरवीर सूरमा. परमेश्वर अपने लोगों को कभी भी लगातार संकट में नहीं देख सकता, इसलिए परमेश्वर ने इस व्यक्ति गिदियोन को चुना और उससे कहा परमेश्वर तुम्हारे साथ है वह तुम्हें इस सकंट से निकालने के लिए आज भी सामर्थी है. तब गिदियोन खड़ा हुआ और परमेश्वर पर भरोषा रखते हुए अपने साथ मात्र 300 साधारण लोगों के द्वारा युद्ध में चल पड़ा और उन लाखो लोगों को परमेश्वर ने इन तीन सौ लोगों के द्वारा हरा दिया और परमेश्वर ने इस्राएलियों को इस महासंकट से बचा लिया.

सीख : परमेश्वर अपने भरोषा रखने वालों को संकट से निकालता है.

पढ़ें : शिमशोन की कहानी

15. कहानी, परमेश्वर चंगाई देता है … | परमेश्वर की प्रार्थना

यहूदा राज्य में राजा हिजकिय्याह राज्य कर रहा था उसने वही किया जो परमेश्वर की दृष्टि में ठीक था. लेकिन उसके घमंड के कारण वह बहुत ही पीड़ित हो गया और इतना बीमार हो गया कि मरने पर था तब परमेश्वर ने अपने के भविष्यवक्ता दास यशायाह को भेज कर उससे कहला भेजा कि, जो आज्ञा अपने घराने को देनी है वो दे दे क्योंकि अब तू बचेगा नहीं वरन मर जाएगा. यह सुनकर राजा हिजकिय्याह दीवार की ओर मुंह करके फूट फूटकर रोने लगा और परमेश्वर को दुहाई देने लगा कि परमेश्वर मुझ पर दया कर और उन कामों को स्मरण कर कि मैं किस रीति से चला और जो आपको अच्छा लगता था वही किया. परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुनकर यशायाह जो अभी यह बोलकर वापस आ रहा था और महल के आंगन में ही पहुंचा था उससे यह कहला भेजा कि वापस जाकर मेरी प्रजा के प्रधान हिजकिय्याह से कह कि मैं तेरी आयु 15 वर्ष और बढ़ाता हूँ…

सीख : परमेश्वर प्रार्थना सुनकर चंगाई देता है.

पढ़ें : यीशु कौन है (रोचक तथ्य)

16. कहानी, परमेश्वर बल प्रदान करता है… | bible stories

यरूशलेम में भेड़फाटक के पास एक जल का कुंड है जो बैतहसदा कहलाता है जिसका अर्थ है अनुग्रह का स्थान परन्तु एक व्यक्ति वहाँ 38 वर्षों से बीमार पड़ा हुआ था. शायद उसकी आधी से अधिक उम्र बीमारी में चली गई थी. उस पर कोई अनुग्रह नहीं हुआ था. उस कुण्ड में उनके अनुसार स्वर्गदूत उतरते थे और वर्ष में एक बार उतरकर उस जल को हिलाते थे और जो कोई उसमें पहले उतरता वह स्वस्थ्य हो जाता था. लेकिन शायद इस व्यक्ति के शरीर में इतना भी बल न था कि वह जल हिलते ही तुरंत उसमें उतर पाता. एक दिन स्वयं यीशु मसीह उस स्थान एन आते हैं और उसी व्यक्ति से कहते हैं क्या तू चंगा होना चाहता है ठीक होना चाहता है. वह व्यक्ति उस परिस्थिति को बताने लगता है तब यीशु मसीह उससे कहते हैं “उठ, और अपनी खाट उठा और चल फिर” वह व्यक्ति तुरंत अपने शरीर में बल पाकर चलने फिरने लगा. और पूरी रीती से स्वस्थ्य हो गया. (यूहन्ना 5)

सीख : परमेश्वर बल प्रदान करते हैं.

17. कहानी, परमेश्वर बुद्धि प्रदान करता है…

एक बार परमेश्वर ने इस्राएल के राजा सुलेमान को स्वप्न में दर्शन देकर कहा, “मुझसे मांग जो कुछ तू चाहता है मैं तुझे दूंगा.” सुलेमान ने परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा, प्रभु परमेश्वर मुझे आप बुद्धि और ज्ञान दीजिये ताकि आपकी प्रजा की ठीक ठीक अगुवाई कर सकूं. परमेश्वर उसके इस विनती से प्रसन्न हो उठे. और कहा, कि तू ने अपने लिए न तो धन दौलत और न ही शोहरत या प्रसिद्धि मांगी वरन अपने लिए नहीं मेरी प्रजा के लिए ही तूने अगुवाई करने हेतु बुद्धि मांगी है इसलिए मैं तुझे बुद्धि दूंगा और इतनी सम्पत्ति और धन दूंगा कि तुझसे पहले किसी के पास न थी. और न तेरे बाद किसी को मिलेगा. कुछ दिनों बाद राजा के राजमहल में दो स्त्रियाँ आई और कहने लगी राजा हमारे बीच न्याय करो. सवाल बड़ी ही उलझन भरा था. दोनों एक बच्चे के पीछे झगड़ रही थी एक कह रही थी कि इसका बच्चा रात को मर गया और वह मेरे बच्चे को अपना बता रही है, दूसरी भी यही बात कह रही थी.

महल के सभी लोग सोचने लगे इस कठिन पहेली का राजा कैसे समाधान करेगा. तभी राजा ने एक तलवार मंगवाया और कहा इस बालक के दो टुकड़े करवा दिया जाए और एक एक टुकड़ा दोनों को दे दिया जाए. तभी एक मां चिल्ला उठी और रोते हुए बोली नहीं इसके टुकड़े नहीं करना यह इस औरत को ही दे दिया जाए. लेकिन दूसरी औरत के चेहरे में कोई शिकन नहीं थी. राजा ने अपना फैसला सुनाया और कहा यह पहली औरत ही बच्चे की असली मां है. जो अपने बच्चे को नुक्सान होते नहीं देख सकती. राजा के इस बुद्धिमानी पूर्ण फैसले से सभी आश्चर्य चकित हो गए.(2 राजा 1-2)

सीख : परमेश्वर का भय मानना बुद्धि का आरंभ है.

18. कहानी, परमेश्वर सुरक्षित रखता है…

निर्गमन की पुस्तक अध्याय 2 में हम मूसा के जन्म के विषय में पाते हैं. इस्राएली लोग मिश्र देश में गुलाम थे और वहां के राजा फिरौन ने यह आज्ञा दी दो धाइयो को की इस्राएलियों के बच्चे हो तो लडकी हो तो बचा रखना और लड़के हों तो उसे पत्थर पर कुचल कर मार डालना. उसी समय इस्राएल के एक लेवी गोत्र में एक बालक का जन्म होता है जो बहुत सुंदर होता है. उसके माता पिता उसे बचा कर रखते हैं परमेश्वर ने सहायता किया की तीन माह तक उस बच्चे को छिपा कर रखें फिर उसकी माता उसे एक टोकरी में रखकर नील नदी में बहा देती है. उस नदी में भी परमेश्वर ने उस असहाय बालक की रक्षा की. उसी दिन फिरौन की बेटी उसी नदी में अपनी दासियों के साथ स्नान करने आती है और उस बालक को पानी में बहता हुआ पाती है और उसका नाम मूसा अर्थात पानी से निकाला हुआ रखती है. और कहती है मैं इसे अपने बालक के समान पालूंगी. इस रीति से मूसा एक राजमहल में पलता और बढ़ता है.

सीख : परमेश्वर सम्हालता है और सुरक्षा प्रदान करता है.

19. कहानी, परमेश्वर भोजन प्रदान करता है…

मिश्र देश से अपने इस्राएलियों को मूसा के द्वारा छुड़ाकर वायदा किये हुए कनान देश में पहुंचाने के समय मार्ग में चालीस वर्ष तक परमेश्वर ने अद्भुत रीती से अपने लोगों को भोजन खिलाया. वहां जहाँ कुछ भी खाने को नहीं था तब परमेश्वर ने उन्हें स्वर्ग से रोटी अर्थात मन्ना खिलाया. जो स्वर्गदूतों का भोजन था वह अपने लोगों को खिलाया. एक बार जब वे मीट मांग रहे थे तो उन्हें पुरवाई चलवाकर पक्षियों का ढेर लगा कर उन्हें मीट खिलाया. जब पानी की प्यास लगी तब उन्हें चट्टान से पानी पिलाया. परमेश्वर ने उन्हें हर प्रकार से सुरक्षित रखा और भूखे नहीं रहने दिया.

सीख : परमेश्वर भोजन प्रदान करता है.

20. कहानी, परमेश्वर जीवित करता है…

एक बार नाइन नामक गाँव में एक स्त्री रहती जो बड़ी ही दुखियारी थी क्योंकि जवानी में ही उसका पति चल बसा और अब उसके जीने का सहारा केवल उसका एकलौता बेटा था. अब वह जवान हो चूका था . माँ की बुढापे की लाठी. लेकिन एक दिन नियति को यह भी पसंद नहीं आया और वह जवान बेटा भी मर गया. माँ के पास अब आंसू भी न थे रोने के लिए. सारे गाँव वाले उस मृत शरीर को कब्रिस्तान ले जा रहे थे. तभी दूसरी ओर से यीशु मसीह अपने अनुयायियों के साथ आ रहे थे. इस ओर से उस लाश को आगे आगे ले जाया जा रहा था दूसरी ओर से जीवन का दाता यीशु मसीह भीड़ की अगुवाई कर रहे थे. यीशु जो सर्वज्ञानी परमेश्वर हैं उन्होंने इस परिस्थिति को जानकार उस मां से कहा मत रो…और उस मृत जवान के शरीर को छुआ और उस जवान को जीवित करके उसकी मां को सौप दिया यह देखकर सारे लोगों में भय छा गया.

सीख : परमेश्वर जीवन दान देते हैं

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पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)

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