बाइबल-सवाल-जवाब

10 Facts About Bible That Will Blow Your Mind in Hindi | बाइबल के 10 प्रश्नों के उत्तर | बाइबल सवाल जवाब

Spread the Gospel

आज हम बाइबल सवाल जवाब पर विचार करेंगे. बाइबल अपने आप में एक अनोखी पुस्तक है. जिसे विश्व में सबसे ज्यादा छपने और बिकने वाली पुस्तक का खिताब भी मिला है. क्योंकि यह परमेश्वर का लिखित वचन है. तो आइये शुरू करते हैं.

बाइबल-सवाल-जवाब
Image by Treharris from Pixabay बाइबल-सवाल-जवाब

बाइबल क्या सिखाती है? | बाइबल के अनुसार प्रेम क्या है

एक शब्द में बोला जाए तो बाइबल प्रेम सिखाती है. यह हम तीन प्रकार से देख सकते हैं पहला है परमेश्वर के प्रति प्रेम. एक बार यीशु मसीह के पास कुछ फरीसी लोग आकर पूछने लगे, हे गुरु सबसे बड़ी आज्ञा कौन सी है तब यीशु ने कहा, तू अपने परमेश्वर से सारे मन सारी शक्ति और सारी बुद्धि से प्रेम कर. (मत्ती 22:37)

और दूसरा है अपने पड़ोसी से अर्थात अन्य लोगो से एवं विश्वासियों से भी प्रेम सिखाती है बाइबल में मनुष्य की सृष्टि, पतन और भविष्य, तथा स्वर्ग और नरक के विषय में भी सिखाया गया है.

बाइबल में क्या लिखा है ?

बाइबल में परमेश्वर का वचन लिखित रूप में लिखा है. बाइबल में परमेश्वर के प्रेम, प्रभु यीशु का अनुग्रह और पवित्रात्मा की सहभागिता के विषय में लिखा है. बाइबल में लिखा है मनुष्य पापी है क्योंकि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है.

बाइबल में लिखा है मनुष्य का उद्धार केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने से ही हो सकता है. एवं जीवन के समस्त पापो से एवं श्रापों से छुटकारा मिल सकता है. बाइबल में लिखा है संसार का अंत जो शीघ्र ही होने वाला है वो कैसे होगा.

बाइबल में कितने अध्याय हैं ?

बाइबल के कुल 66 पुस्तकों को दो भागों में बांटा गया है पुराना नियम और नया नियम जिसमें कुल मिलाकर 1189 अध्याय हैं पुराने नियम में 39 पुस्तकें हैं और नया नियम में 27 किताबे हैं. अत: इस रीति से देखा जाए तो बाइबल एक छोटी पुस्तकालय है. पुराना नियम हिब्रू में लिखा गया था और नया नियम यूनानी में.

बाइबल कितने प्रकार के होते हैं?

बाइबल मुख्यत: एक ही प्रकार की है जिसमें नया नियम और पुराना नियम है लेकिन रोमन कैथलिक लोगों ने बाइबल में कुछ और किताबें भी मिला ली हैं जिन्हें अपोक्रिपा कहा जाता है. कुछ लोगों का मानना है वे जोड़ी गई किताबें मनुष्य के मन की बातें हैं. और केवल 66 पुस्तकें ही अधिकारिक रूप से पढ़ी जाती हैं.

बाइबल किसने लिखा था?

बाइबल को कुल 40 लेखकों ने अलग अलग समय में अलग अलग परिस्थितियों में लिखा था जो ज्यादातर एक दूसरे से कभी नहीं मिले. बाइबल का लिखने वाला परमेश्वर का आत्मा है. मतलब पवित्रात्मा की प्रेरणा पाकर लोगों ने लिखा या ऐसा कहें परमेश्वर ने उनसे कहा और लोगों ने लिखा.

बाइबल के लेखकों में से कुछ कोई किसान था तो कोई भेड़ बकरी चराने वाला, कोई राजा था तो कोई भविष्यवक्ता. लेकिन सभी का संदेश पूरी बाइबल में एक ही लय में है और वो है परमेश्वर का प्रेम मानव जाति के लिए.

बाइबल के मुख्य विषय क्या हैं?

बाइबल के मुख्य विषयों में सबसे पहला है परमेश्वर का प्रेम. परमेश्वर दयालु है और विलम्ब से क्रोध करने वाला है. मनुष्य पापी है और पाप के स्वभाव में रहता है. शैतान परमेश्वर और मानवजाति का शत्रु है और उसका काम नाश करना और हत्या करना है.

प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह से इस दुनिया का उद्धार हो सकता है और उसके आगमन पर इस दुनिया का अंत हो जाएगा और शैतान को नरक में डाला जाएगा. और एक नयी पृथ्वी और नया आकाश का सृजन होगा. बाइबल में 1260 स्पष्ट प्रतिज्ञाएं हैं जो सभी मानव जाति के लिए हैं.

बाइबल पढ़ने से क्या आशीषें हैं?

बाइबल पढने वाला पाप से बचा रहेगा. और पाप करने वाला पवित्रबाइबल से दूर रहेगा. यह मनुष्य को अन्धविश्वास के जाल से बचाए रखती है. बाइबल का पढ़ने वाला बुद्धि पाता है और समझदार हो जाता है. बाइबल को पढ़ने से विश्वास बढ़ता है और विश्वास इस दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है.

बाइबल कैसे पढ़े? | बाइबल पढ़ने से क्या होता है?

बाइबल को रोज पढ़ें हो सके तो सुबह और शाम समय निकालकर एक निश्चित समय में पढ़ें. क्योंकि यह परमेश्वर का वचन है तो इसे परमेश्वर की सहायता से पढ़ें मतलब इसके पढने से पहले प्रार्थना अवश्य करें कि जो पढ़ें परमेश्वर उसे समझने में सहायता करें.

इसे एकाग्र मन से शांत स्वभाव में होकर पढने से इसके अनेक फायदे हैं. यह मन में शांति और शक्ति प्रदान करती है. इसका पढने वाला हर भले काम में सफल होता है.

बाइबल के अनुसार शादी क्या है?

बाइबल के अनुसार शादी या विवाह आदर के योग्य है. इसकी सृष्टि स्वयं परमेश्वर ने की थी. परमेश्वर ने ही पहले दुल्हे और दुल्हन की रचना की और उन्हें मिलाया. और कहा फलो फूलों और पृथ्वी में भर जाओ. बाइबल में विवाह के बाहर यौनसंबंध को घिनौना पाप कहा गया है. जिसे व्यभिचार की संज्ञा दी गई है.

बाइबल के अनुसार जीवन क्या है?

बाइबल के अनुसार जीवन एक नया जीवन है जो मसीह यीशु में है. यीशु में जीवन बहुतायत का जीवन अर्थात एक विजयी मसीही जीवन है.. जिसमें हम सड़ाहट से छुटकारा पाकर अनंत जीवन में प्रवेश करते हैं. जो कोई मसीह यीशु में है वे नई सृष्टि हैं पुरानी बाते बीत गई. अब उन पर दंड की आज्ञा नहीं (रोमियों 8:1)

अर्थात उन पर इस धरती में कोई श्राप या काला जादू या दुष्टात्मा का प्रकोप नहीं छू सकता और उन पर अधोलोक के फाटक भी प्रबल नहीं होंगे. वे नरक नहीं बल्कि स्वर्ग राज्य के वारिस होंगे.

youtube channel : https://youtu.be/QCRkmJv6ST4

इन्हें भी पढ़े

उपवास प्रार्थना कैसे करें ?

बाइबल की 20 बेहतरीन कहानियां

जीवन में दुःख और सुख दोनों जरूरी हैं

हिंदी सरमन आउटलाइन

यीशु की प्रार्थना

पवित्र बाइबिल नया नियम का इतिहास

31 शोर्ट पावरफुल सरमन

यीशु कौन है

कभी हिम्मत न हारें

हम कैसे विश्वास को बढ़ा सकते हैं

प्रार्थना के 20 फायदे

प्रतिदिन बाइबल पढ़ने के 25 फायदे

प्रकाशितवाक्य की शिक्षा

https://biblevani.com/

पास्टर राजेश बावरिया (एक प्रेरक मसीही प्रचारक और बाइबल शिक्षक हैं)

[email protected]


Spread the Gospel

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top