यीशु-के-दृष्टांत

Which is the famous parable of Jesus in Hindi | bible sermon outline in hindi | यीशु के दृष्टांत #1

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हेलो दोस्तों आज हम पढेंगे यीशु के दृष्टांत #1 जिसका शीर्षक है विवाह भोज का वस्त्र Which is the famous parable of Jesus in Hindi यह एक बाइबल संदेश के रूप में देखेंगे. जो हम पाते हैं. (मत्ती 22:8-13)

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यीशु के दृष्टांत #1 | विवाह भोज का वस्त्र

यीशु के दृष्टांत कहानी :-

प्रभु यीशु ने एक दृष्टांत सुनाया कि स्वर्ग का राज्य ऐसा है जैसे किसी राजा ने अपने पुत्र के विवाह में एक बड़ा भोज रखा जिसमें उसने अपने पूरे राज्य के लोगों में भोज हेतु नियन्त्रण देने लिए दासों को भेजा,

लेकिन कुछ लोगों ने मना किया और कुछ लोगों ने मिलकर उसके दासों को अपमान करके मार डाला. तब उसने अपने सैनिकों को भेजकर उन नगरों को जहाँ पर दासों को मारा गया था जलवा दिया.

लेकिन भोज तैयार था इसलिए कुछ और दासों को भेजकर नगर के चौराहों पर जितने लोग मिले सभी को बुलवाने को कहा. तब सभी समाज के ठुकराए हुए लोगों को बुलवाया गया और भोज वाला महल लोगों से भर गया.

लेकिन जब राजा अतिथियों से मिलने आया तो देखा कि एक व्यक्ति विवाह का वस्त्र पहने हुए नहीं था. राजा ने उस व्यक्ति से पूछा हे मित्र तू बिना विवाह का वस्त्र अंदर कैसे आ गया उस व्यक्ति के पास कोई जवाब नहीं था.

यीशु के दृष्टांत व्याख्या :-

वह व्यक्ति भोज में आया तो था लेकिन मन से आना नहीं चाहता था. वह विवाह के भोज का आनन्द तो उठाना चाहता था लेकिन राजा के आधीन नहीं रहना चाहता था. यह भोज राजा के पुत्र के विवाह के सम्मान के लिए रखा गया था.

लेकिन यह व्यक्ति किसी भी रीती से सम्मान नहीं करना चाहता था. वहां भोज के महल में प्रवेश करने के लिए विवाह के वस्त्र पहिनना जरूरी नियम था. लेकिन उसने विवाह के वस्त्र को न पहन कर उस नियम का उलंघन किया था.

राजा ने केवल एक ही शर्त रखी थी. कि जो भी भोज में आए वो विवाह के वस्त्र अवश्य धारण करें. उसने खुले रूप से राजा के निमंत्रण को अस्वीकार नहीं किया लेकिन मन ही मन वह ऐसा कह रहा होगा. मैं नहीं चाहता कि तू हम पर राज्य करे या हमारा राजा हो.

यह कुछ ऐसे व्यक्ति के जैसे है जो चर्च में आराधना तो करने आते हैं लेकिन प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता नहीं स्वीकार करते. वो प्रभु यीशु की आशीष, चंगाई, शिक्षा और बरकतें तो पाना चाहते हैं लेकिन प्रभु यीशु को अपना जीवन नहीं देना चाहते.

चर्च में आकर यदि हमने भेंट दिया, बप्तिस्मा लिया, प्रभु भोज में शामिल हुए लेकिन प्रभु यीशु को प्रभु और स्वामी करके ग्रहण नहीं किया तो हमारा चर्च आना व्यर्थ ही हुआ. हमारा उद्धार हुआ ही नहीं.

उसे राजा ने देखा V. 11

राजाओं के राजा प्रभु परमेश्वर की आखों से कोई बच नहीं सकता उसकी आखें आग की ज्वाला के समान हैं जो सबको देखती रहती हैं. हम सी सी कैमरे से बच सकते हैं लेकिन उसकी आँखों से नहीं. राजा ने उस व्यक्ति को भी देखा.

राजा ने उस व्यक्ति से प्रश्न पूछा V. 12

राजा ने उस व्यक्ति से प्रश्न पूछा तू अंदर कैसे आ गया. हम सभी एक न एक दिन उस राजाओं के राजा प्रभुओं के प्रभु के सम्मुख खड़े होंगे. और हम सभी को अपना व्यक्तिगत हिसाब किताब देना होगा.

उस व्यक्ति के पास कोई भी जवाब नहीं था क्योकि उसे सारे नियम कानून मालुम थे. इसलिए कोई भी बहाना अब काम नहीं आ सकता था. उसका कोई भी जवाब राजा को संतुष्ट नहीं कर सकता था.

अत: उसका मुंह बंद हो गया. उसके पास विवाह का वस्त्र नहीं था तो उसे विवाह भोज में आने का कोई अधिकार नहीं था. यदि हमारे पास भी विवाह का वस्त्र नहीं है तो हम भी उस विवाह भोज में शामिल नहीं हो सकते अब सवाल उठता है.

राजा ने विवाह वस्त्र न होने पर उसे दंड दिया V. 13

उसे दंड के रूप में उसके हाथ पैर बांधकर बाहर अन्धकार वाले स्थान में फेंक दिया गया जहाँ रोना और दांत पीसना है. वह अयोग्य अथिति एक अपराधी के समान दंड मिला.

हमारे लिए वह विवाह का वस्त्र क्या है?

यशायाह 61:10 में लिखा है उसने मुझे उद्धार के वस्त्र पहिनाएं हैं और धार्मिकता की चादर ओढ़ाई है, जैसा दूल्हा फूलों की माला से अपने आप को सजाता है और दुल्हन अपने गहनों से अपना सृंगार करती है.

यह परमेश्वर के द्वारा प्रदान किया जाने वाला वस्त्र है.

उत्पत्ति 3:21 के अनुसार अदन की वाटिका में परमेश्वर ने आदम और हव्वा को वस्त्र पहिनाने के लिए एक निर्दोष मेमने का लहू बहाया गया. ताकि वे परमेश्वर के सम्मुख खड़े हो सके. प्रभु परमेश्वर स्वयं वस्त्र प्रदान करता है.

यह बिलकुल मुफ्त है लेकिन बेशकीमती है

परमेश्वर ने इसकी कीमत चुकाई है. यह उद्धार मुफ्त में है लेकिन इसके लिए परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र यीशु को इस दुनिया के बदले में मरने भेजा..क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वो नाश न हो बल्कि अनंत जीवन पाए. (यूहन्ना 3:16)

हम यह वस्त्र कैसे प्राप्त करें?

इस वस्त्र को प्राप्त करने के लिए और धारण करने के लिए हमें हमारे जीवन के मैले चीथड़े रूपी पाप और कपड़े अलग करने होंगे. यशायाह 64:6 में लिखा है हमारे धर्म के काम परमेश्वर के सम्मुख मेंले चिथड़ों के समान हैं. जकर्याह 3:4 प्रभु ने कहा इसके ये मैले कपड़े उतारो देख मैंने तेरा अधर्म दूर किया और मैं तुझे सुंदर वस्त्र पहिना देता हूँ.

यह वस्त्र स्वयं यीशु मसीह है…

उस वस्त्र के पहनने वाले की यह पहचान है कि वह पवित्र जीवन जीएगा. हमारा चरित्र बताता है कि हम उस पवित्र वस्त्र को पहिने हैं या नहीं. रोमियो 13:14 में लिखा है वरन प्रभु यीशु को पहिन लो.

सभो. 9:8 तेरे वस्त्र सदा उजले रहें…उस वस्त्र की रखवाली हमेशा करना है. कि पाप में दूषित न हो जाएं.

प्रकाशित 16:15 देख मैं चोर के समान आता हूँ, धन्य है वह जो जागता रहता है और अपने वस्त्र की चौकसी करता है.

विश्वास करते हैं यीशु के दृष्टांत #1 आपको पसंद आया होगा और आपके लिए आशीष का कारण होगा यदि आपको अच्छा लगता है तो आप कमेन्ट करना ताकि हम यीशु के और भी दृष्टांतों की व्याख्या करके यहाँ जोड़ेंगे.

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